नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी की वजह से निजी वाहनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है, जबकि साझा परिवहन से लोग दूरी बना रहे हैं। इससे एक ओर वाहन निर्माताओं को फायदा होने की सम्भावना है तो दूसरी ओर पर्यावरण को क्षति की आशंकाओं में वृद्धि होने की आशंका है। संक्रमण फैलने की दर पर अंकुश लगने की भी सम्भावना है।

एक वाहन कलपुर्जा बनाने वाली कंपनी के कर्ताधर्ता के अनुसार महामारी के चलते ‘इलेक्ट्रिक’ वाहनों को लेकर जो रोमांच था, वह भी धूमिल हो गया। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में निजी वाहनों की मांग में जोरदार इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए देश के परंपरागत वाहन उद्योग का भविष्य काफी उज्ज्वल है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक कोविड-19 की वजह से रोजाना इस्तेमाल के लिए निजी वाहनों का महत्व बढ़ा है। साझा वाहनों को कभी भविष्य का परिवहन बताया जा रहा था, लेकिन अब ऐसी बात नहीं रह गई है। अर्थव्यवस्थाओं के खुलने के बाद व्यक्तिगत या निजी वाहनों की मांग ‘काफी-काफी मजबूत है। चीन में मांग काफी तेजी से सुधरी है। जापान और दक्षिण कोरिया में भी ऐसा ही हुआ है। कम से कम अगले दो साल के लिए चीजें काफी स्पष्ट हो गई हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published.