नई दिल्ली. आपातकाल के दौरान लुटियन दिल्ली में एक संपत्ति पर कब्जे के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र और संपदा निदेशालय (डीओई) से जवाब मांगा है।

न्यायालय में यह मामला 94 वर्षीय महिला वीरा सरीन के बच्चों ने दाखिल किया है। सरीन ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को असंवैधानिक घोषित कराने के लिए हाल ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने डीओई, श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा ‘तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (सम्पत्ति समपहरण) अधिनियम’ (साफेमा) के तहत सक्षम प्राधिकारी को समन जारी कर उनसे लिखित बयान दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले पर 26 अप्रैल को सुनवाई होगी।

मामले में केंद्र सरकार से कस्तूरबा गांधी मार्ग पर अंसल भवन में एक संपत्ति के मई 1999 से जुलाई 2020 तक अवैध इस्तेमाल और उस पर कब्जे के संबंध में किराये को लेकर हुए नुकसान, बकाया रखरखाव शुल्क और लंबित संपत्ति कर के रूप में क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।

ये मामला राजीव, दीपक और राधिका सरीन ने संपदा निदेशालय, श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (सम्पत्ति समपहरण) अधिनियम (साफेमा) के तहत सक्षम प्राधिकारी के खिलाफ केजी मार्ग की संपत्ति के संबंध में दायर किया था।

वादियों का कहना है कि वे संपत्ति के मालिक हैं, जिस पर अधिकारियों ने 1998 में साफेमा के तहत नियंत्रण कर लिया था और इसे संपदा निदेशालय को किराये पर दे दिया गया। संपदा निदेशालय ने एक मई, 1999 से वादियों को किराये का भुगतान बंद कर दिया। जबकि उनका कहना है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2014 में संपत्ति पर सरकार के कब्जे को रद्द कर दिया लेकिन अधिकारी उन्हें संपत्ति नहीं लौटा रहे थे।

Leave a comment

Your email address will not be published.