संयुक्त अभिभावक संघ का आरोप

जयपुर. करीब दस महीने से बंद स्कूल खुलते ही राजधानी जयपुर के अभिभावकों और निजी स्कूल संचालकों के बीच फिर ठन गई है। स्कूल संचालक चाहते हैं कि वे राजस्थान हाईकोर्ट के 18 दिसम्बर के फैसले की पालना किए बिना अभिभावकों से पुराने ढर्रे पर फीस वसूल लें। हालांकि निजी स्कूल विशेष अनुमति याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट के दर पर जा पहुंचे हैं लेकिन शीर्ष अदालत ने उस पर सुनवाई की अगली तारीख दे दी है। सुप्रीम कोर्ट निजी स्कूल संचालकों की एसएलपी पर अब 25 जनवरी को सुनवाई करेगा।

संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रदेशभर के अभिभावक फीस जमा करवाना चाहते हैं लेकिन निजी स्कूल संचालक कोर्ट के आर्डर अनुसार फीस नहीं लेना चाहते और मनमानी फीस वसूली पर अड़े हुए हैं।

बिट्टू के अनुसार इसकी बानगी मंगलवार को रामबाग सर्किल स्थित सुबोध स्कूल प्रबंधन से अभिभावक संघ की मुलाकात के दौरान मिली। शुरूआत में स्कूल संचालक अभिभावकों से मिलने से कतराते रहे। काफी देर बाद सुबोध शिक्षा समिति ग्रुप के सीईओ विष्णु शर्मा आए लेकिन वे मदवार फीस सहित फीस एक्ट 2016 और राजस्थान उच्च न्यायालय आदेश की पालना के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। स्कूल में पीटीए गठन पर सीईओ का जवाब था कि इससे अभिभावकों का कोई मतलब नही है। पीटीए गठन केवल टीचरों के निकाले जाने पर कार्रवाई के लिए किया जाता है।

सीईओ के जवाब से हतप्रभ संयुक्त अभिभावक संघ अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कोर्ट के आदेश की जानकारी के साथ ही उन्हें पीटीए और एसएलएफसी के बारे में बताया। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेशनुसार स्कूल नहीं खुलने तक ऑनलाइन क्लास का 60 फीसदी ट्यूशन फीस और स्कूल खुलने के बाद 70 फीसदी ट्यूशन फीस के आदेश की जानकारी भी सीईओ को दी। फीस एक्ट और उच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी देने पर सीईओ विष्णु शर्मा थोड़े नरम पड़े और आश्वासन दिया कि वे स्कूल मैनजमेंट के समक्ष अभिभावकों की पूरी बात रखेंगे और कोर्ट व फीस एक्ट के मुताबिक फीस निर्धारित करवाएंगे। सुबोध स्कूल में मनीषा शर्मा, अंकित पालावत, नवीन शर्मा, संजीव शर्मा, संजय गोयल, गिर्राज अग्रवाल, मनोज जसवानी, श्रीमती अमृता सक्सेना, दौलत शर्मा सहित सुबोध स्कूल के 70 से अधिक अभिभावक पहुंचे।

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