समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण पर अध्ययन

नई दिल्ली. वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है कि समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण कैसे बढ़ रहा है। उनका दावा है कि दुनिया की ज्यादातर नदियां इसे ले जाकर समुद्र में उंडेल रही हैं।

इसके लिए प्लास्टिक प्रदूषण पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने गंगा नदी का इस्तेमाल किया। उन्होंने प्लास्टिक बोतलों में इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाकर उन्हें गंगा में छोड़ दिया। कुछ ही दिनों में ये बोतल बंगाल की खाड़ी तक जा पहुंची। इलेक्ट्रॉनिक टैग वाली बोतल ने अधिकतम दूरी 2854 किलोमीटर (1,786 मील) 94 दिनों में पूरी कर ली।

एक्सटेर यूनिवर्सिटी औऱ जूओलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेएसएल) और नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी सी टू सोर्स को साथ मिलकर किए गए इस अध्ययन में सामने आया कि प्लास्टिक पीस नदी या समुद्र में फेंका जाए तो वह दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंच सकता है।
बोतल समुद्र में लम्बी दूरी नाप सकती हैं क्योंकि वहां कोस्टल करंट पहले होता है। उसके बाद वह और चौड़े स्तर पर फैल जाता है। अध्ययन करने वालों ने 500 मिलीलीटर की 25 बोतलों को गंगा में फेंका था। अध्ययन करने वालों का कहना है कि इस तरीके से स्कूलों में प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में बताया जा सकता है ताकि बच्चे जान सके कि बोतल कहां जाती हैं। इस तरह से समुद्र में किस तरह से प्लास्टिक प्रदूषण होता है और यहां कहां जाकर रुकता है इसे आसानी से जाना जा सकता है।

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