नई दिल्ली. पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारा दरबार साहिब (करतारपुर) के प्रबंधन को लेकर फिर से पलटी खाई है। सरकार ने आदेश दिया है कि गुरुद्वारा दरबार साहिब के धार्मिक कार्यों का प्रबंधन पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा समिति द्वारा ही किया जाएगा। तीन नवंबर को जारी नोटिफिकेशन में गुरुद्वारा दरबार साहिब (करतारपुर) के रखरखाव एवं प्रबंधन की ज़िम्मेदारी इवेक्वी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के प्रशासकीय नियंत्रण में एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट को सौंप दिया गया था।

भारत समेत दुनिया ने की थी निंदा

पाकिस्तान सरकार के इस कदम का भारत समेत दुनिया भर में सिख समुदाय ने विरोध किया था। गुरुद्वारा दरबार साहिब सिख धर्म को मानने वालों के लिए पवित्र स्थान है। भारत समेत दुनिया भर से इस पवित्र स्थान पर हज़ारों श्रद्धालु माथा टेकने के लिए आते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार के कदम की कड़ी निंदा करते हुए ये फ़ैसला वापस लेने की अपील की थी। विदेश मंत्रालय ने इसके लिए पाकिस्तान के राजनयिक को बुलाकर विरोध जताया था।

भारत सरकार ने कहा था ‘खुल गई पाकिस्तान की पोल’

पाकिस्तान पवित्र गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का प्रबंधन एवं देखरेख का काम अल्पसंख्यक सिख समुदाय की संस्था पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से लेकर एक गैर सिख संस्था इवेक्वी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के हाथों देने पर भारत सरकार ने बयान भी दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि इस तरह का कार्य केवल पाकिस्तानी सरकार की वास्तविकता और उसके नेतृत्व के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करने, संरक्षण देने के लंबे दावों की पोल खोलते हैं।
पाकिस्तान ने कहा था, ‘बदनाम करने की कोशिश’

भारत ने सिख अल्पसंख्यक समुदाय को पवित्र गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के प्रबंधन के उसके अधिकार से वंचित करने के मनमाने फैसले को पाकिस्तान सरकार से वापस लेने को कहा था। जवाब में पाक विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान स्पष्ट रूप से करतारपुर कॉरिडोर के ख़िलाफ़ भारतीय दुष्प्रचार को पूरी तरह ख़ारिज करता है। ये दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार मूल रूप से सिख समुदाय के हितों के प्रति चिंता पैदा करके ‘पीस कॉरिडोर’ पहल को बदनाम करने की कोशिश है।

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