जासूसी की आशंकाओं को निर्मूल कर देगा ये निर्णय

नई दिल्ली. संचार सेवाओं के जरिए सरकारी तंत्र की जासूसी की आशंका को निर्मूल करने के लिए बीएसएनएल ने दो अहम निर्णय लिए हैं। वह अपनी 4जी सेवा के कोर सिस्टम में सिर्फ भारत की कम्पनियों को ही घुसने देगी। विदेशी कम्पनियों को इस क्षेत्र में काम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार संचार तंत्र रेन और कोर सिस्टम के जरिए काम करता है। रेन सिस्टम टावर के साथ जुड़ा होता है जबकि कोर सिस्टम संपूर्ण संवाद तंत्र पर नियंत्रण रखता है। इस सिस्टम में काम करने वाले संचार तंत्र के जरिए की जा रही तमाम बातचीत को कभी भी सुन सकते हैं। इसलिए इस सिस्टम में विदेशी कम्पनियों की घुसपैठ कभी भी देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न कर सकती है। बीएसएनएल के इस निर्णय से विदेशी कंपनियों, ठेकेदारों के जरिए जासूसी की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

सरकार ने निर्णय किया है कि टावर पर लगाया जाने वाला रेडियो सिस्टम देसी या विदेशी कोई भी कंपनी लगा सकती है लेकिन उन्हें सरकार को सोर्स कोड देना होगा ताकि सरकार जब भी चाहे एक क्लिक करके यह पता लगा लेगी कि रेडियो सेवा देने वाली कंपनी जासूसी तो नहीं कर रही है। हालांकि भारतीय उपकरणों की बाध्यता संचार कम्पनियों पर आर्थिक भार डालने वाली होगी लेकिन इससे देश की जासूसी की तमाम शंकाओं का निवारण हो जाएगा।

यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री से लेकर सेना मुख्यालय तक अर्थात समूचा सरकारी तंत्र बीएसएनएल सेवाओं पर निर्भर है और उसकी 4जी सेवा के जरिए जासूसी की कोशिशों से ​इनकार नहीं किया जा सकता। इसी के चलते बीएसएनएल ने ये निर्णय लिया है कि कोस सिस्टम में सिर्फ भारतीय कम्पनियों को ही इजाजत दी जाएगी।

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