विशेषज्ञों का मत

नई दिल्ली. टीआरपी रेटिंग मामले में खुलासे के बाद सक्रिय हुई भारत सरकार का मानना है कि टीआरपी प्रणाली में एक लंबे अरसे से सुधारों की आवश्यकता रही है। किस टीवी चैनल को कितना देखा जा रहा है टेलीविजन रेटिंग पॉइंट या टीआरपी यह मापने का एक पैमाना है। इसके दायरे में मनोरंजक, ज्ञानवर्धक और न्यूज सभी तरह के कार्यक्रम दिखाने वाले चैनल आते हैं। टीआरपी को मापने के लिए बीएआरसी नामक संस्था अधिकृत है। यह संस्था पूरे देश में कुछ घरों को चुनकर उनके टीवी सेट में व्यूवरशिप मापने के उपकरण लगाती है, जिन्हें बैरोमीटर कहते हैं।

बीएआरसी ने पूरे देश में करीब 45,000 घरों में ये बैरोमीटर लगाए हुए हैं। कौन सा चैनल कितना लोकप्रिय है टीआरपी ही इसका फैसला करती है। लोकप्रियता के आधार पर चैनलों को विज्ञापन मिलते हैं और उन्हीं से चैनलों की कमाई होती है। सबसे बड़ी समस्या पर्याप्त संख्या में बैरोमीटरों का ना लगना है। जानकार कहते हैं कि 84 करोड़ टेलीविजन दर्शकों के बीच सिर्फ 45000 मीटर लगाने से दर्शकों की संख्या का सही अंदाजा नहीं होता।

ना सिर्फ मीटरों की संख्या अपर्याप्त है बल्कि यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार और धोखेबाजी के आगे कमजोर है। कौन से घरों में मीटर लगे हैं यह जानकारी गुप्त रखनी होती है लेकिन यह जानकारी लीक की जाती है और उसके बाद सैंपल के काफी छोटा होने की वजह से सिर्फ कुछ ही टीवी सेटों के साथ छेड़छाड़ कर सैंपल को बड़े पैमाने पर अपने हिसाब से बदला जा सकता है। 84 करोड़ टेलीविजन दर्शकों के बीच सिर्फ 45000 मीटर लगाने से दर्शकों की संख्या का सही अंदाजा नहीं होता।

मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया है कि सिर्फ पांच घरों में ऐसी छेड़छाड़ की गई थी। इतने कम घरों में लोगों को पैसे दे कर सप्ताह में अगर दो घंटे भी कोई चैनल लगा कर छोड़ देने को कहा जाए तो उससे उस टीवी चैनल की टीआरपी में बड़ा उछाल आ जाएगा। टीवी रेटिंग के साथ छेड़छाड़ को पुलिस अमूमन बड़ा अपराध नहीं मानती और शिकायत मिलने पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाती। ऐसे में टीवी रेटिंग के साथ छेड़छाड़ की रोकथाम के लिए अलग से कानून बनाने से भी शायद कोई परिवर्तन आए।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टीआरपी समस्या से निपटने के लिए जो समिति बनाई है, उसके अध्यक्ष प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पाती होंगे। उनके अलावा समिति के तीन और सदस्य होंगे। समिति मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। समय समय पर ट्राई द्वारा दी गई सिफारिशों और टेलीविजन उद्योग के मौजूदा हालात का भी निरीक्षण करेगी।

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