जयपुर. राजस्थान पुलिस अब थानों में किसी को थप्पड़ तक नहीं लगाएगी। यहां तक कि उसे गालियां देने से पहले भी सौ बार सोचना होगा क्योंकि अब प्रत्येक थाने सीसीटीवी कैमरों से कवर होंगे और उनकी पहुंच हवालात से लेकर एसएचओ कक्ष तक होगी। इन कैमरों की मॉनिटरिंग पुलिस अधीक्षक से लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक करेंगे। इसके लिए जिला और राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनाए जाएंगे।

थानों में कैमरे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आदेश पर लगाए जा रहे हैं। असल में राज्य में पिछले एक साल में हिरासत में मौत के कई मामलों के साथ ही आए दिन ये शिकायतें मिलती रहती हैं कि पुलिस थाने लाकर निर्दोषों की जोरदार पिटाई करती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने सीसीटीवी लगाने के कार्य की मॉनिटरिंग तथा इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय निगरानी समितियां गठित करने को मंजूरी दे दी है। थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रथम चरण के लिए 8 करोड़ 40 लाख रूपये के वित्तीय प्रावधान किए गए है। इस राशि से सभी थानों में प्रवेश एवं निकासी द्वार सहित अन्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की परियोजना की कुल लागत राशि 16.80 करोड़ रूपये है।

थानों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए प्रमुख शासन सचिव गृह की अध्यक्षता में एक समिति गठित होगी। प्रमुख शासन सचिव वित्त, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष तथा महानिरीक्षक पुलिस इस समिति के सदस्य तथा संयुक्त शासन सचिव पुलिस, सदस्य सचिव होंगे। यह समिति प्रदेश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के कार्य का नियमित पर्यवेक्षण करेगी।

संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में निगरानी समिति का गठन होगा। जिला स्तरीय निगरानी समितियों में संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट, संबंधित नगरीय निकाय प्रमुख (शहरी क्षेत्रों के लिए), जिला प्रमुख (ग्रामीण क्षेत्र के लिए) तथा पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त सदस्य होंगे।

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