नई दिल्ली. देश के लोग एक नए शब्द के इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएं। केन्द्र सरकार ने निर्देश दिया है कि शहरों की सीवर लाइनों में प्रवेश के लिए बनाए जाने वाले मैनहोल को अब मशीन-होल कहा जाएगा। सरकार मैला ढोने की प्रथा पर रोक लगाने में नाकाम पुराने कानून को बदलकर नया कानून ला रही है। इसके साथ ही सरकार ने अगस्त 2021 तक हर हालत में सीवरलाइनों की सफाई मशीनों से कराने का ऐलान किया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले पांच सालों में सीवर साफ करने वाले 376 लोगों की मौत हो गई। पिछले 10 वर्षों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 631 लोगों की जान जा चुकी है।

मैला ढोने की प्रथा को बंद करने की कवायद

आवास और शहरी कार्य राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार मैला ढोने की प्रथा बंद करने वाले शहरों का ऑन-ग्राउंड मूल्यांकन मई 2021 में एक स्वतंत्र एजेंसी करेगी। शहरों को तीन उप-श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। सभी श्रेणियों के विजेता शहरों को 52 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी।

ज्ञात रहे कि मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के तहत किसी भी व्यक्ति को सीवर में भेजना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर किसी विषम परिस्थिति में सफाईकर्मी को सीवर के अंदर भेजा जाता है तो इसके लिए 27 तरह के नियमों का पालन करना होता है। नियमों के लगातार उल्लंघन के चलते सीवर सफाई के दौरान श्रमिकों की जान आए दिन जा रही है।

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