आरटीआई के जवाब से हुआ खुलासा

जयपुर. राजस्थान के रक्तदाताओ सावधान, जिस रक्त को दान देकर आप अमूल्य जीवन बचाने का पुण्य कमाने का मौका समझते हैं, उसका राजस्थान ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की नजर में कोई महत्व नहीं है। काउंसिल को ना तो ये पता होता है कि रक्तदान के लिए लगाए गए शिविरों में रक्तबैंक, रक्त विशेषज्ञ भेजते हैं अथवा झोला छाप भेजकर कैम्पों से रक्त एकत्रित करा लेते हैं और ना ही उसके पास ये रिकार्ड है कि जिस ब्लडबैंक को रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति दी जा रही है, उसके पास लाइसेंस भी है अथवा नहीं। यहां तक कि काउंसिल के पास ये रिकार्ड भी नहीं है कि राजस्थान में कितने ब्लडबैंक हैं और उनमें नियुक्त ब्लड ट्रांसफ्यूजन सम्बंधी विशेषज्ञ कौन हैं!

एक आरटीआई के जवाब में राजस्थान ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की ओर से दी गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है। एक आरटीआई आवेदक ने काउंसिल से पूछा था कि राजस्थान में कितने निजी एवं सरकारी ब्लड बैंक है! जवाब में काउंसिल ने कहा कि वह इसका कोई रिकार्ड नहीं रखती। ब्लड बैंकों में नियुक्त ब्लड ट्रांसफ्यूजन विशेषज्ञों के बारे में भी काउंसिल का कहना है कि वह इससे कोई इत्तिफाक नहीं रखती कि ब्लड बैंकों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन विशेषज्ञों की नियुक्ति है अथवा नहीं! काउंसिल को ये भी पता नहीं होता कि राज्य के ब्लड बैंक अपना लाइसेंस समय पर रिन्यू कराते हैं अथवा नहीं।

इसे अंधेरगर्दी माने अथवा काउंसिल की कर्तव्य में लापरवाही, लेकिन ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि ब्लड बैंक खोलने के लिए जिस एनओसी की जरूरत होती है, उसे काउंसिल जारी तो करती है लेकिन उसका रिकार्ड नहीं रखती। मजे की बात ये कि काउंसिल को ये भी पता नहीं है कि ब्लड बैंकों को जारी की जाने वाली एनओसी कौन जारी करता है और उसका रिकार्ड कहां है! आरटीआई के जवाब में काउंसिल ने कहा है कि ये सूचना अस्तित्व में ही नहीं है।

जबकि ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट में वर्णित ब्लड बैंकों के लिए बनाए गए नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रयोगशाला सम्बंधी एमडी अथवा ब्लड ट्रांसफ्यूजन विशेषज्ञ की नियुक्ति ब्लड बैंक में न सिर्फ अनिवार्य है बल्कि रक्तदान के लिए लगाए गए शिविरों में उसकी उपस्थिति आवश्यक है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल का गठन ही इसलिए किया गया कि वह ब्लड बैंकों पर न सिर्फ निगरानी रखे बल्कि रक्तदान शिविर लगाने वाले ब्लड बैंकों को बाध्य करे कि वे शिविर में विशेषज्ञों की उपस्थिति में ही रक्तदान करवाएं और उसे संक्रमण से बचाते हुए स्टोरेज के लिए ब्लड बैंक तक ले जाएं।

इसके अलावा शिविर में रक्तदाता और रक्त को संक्रमण से बचाने के भी पूरे इंतजाम हों। इस मामले में आरटीआई आवेदक का कहना है कि उसे यह जानकारी मिली थी कि जयपुर के ब्लड बैंक लालच देकर रक्तदान शिविरों में लोगों को ला रहे हैं और चोरी छुपे उस रक्त की बिक्री भी कर रहे हैं। इसीलिए उसने काउंसिल से ये जानकारियां मांगी थीं। उल्लेखनीय है कि रक्त की बिक्री न सिर्फ गम्भीर अपराध है बल्कि आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत रक्त बिक्री प्रमाणित होने पर सात साल तक की सजा हो सकती है।

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