बैंक एसोसिएशन का आरोप

नई दिल्ली. ग्रामीण भारत में एक प्रसिद्ध कहावत है, जहां-जहां पैर पड़े दुष्टन के,वहां-वहां हो गया बंटाधार। जी हां जिस लक्ष्मी विलास बैंक की हाल ही बर्बादी हुई है, उसने भी कई बैंकों के हजारों करोड़ लेकर फरार हुए नीरव मोदी को ऋण दिया था। ये आरोप ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वैंकटचेलम ने लगाया है।
एसोसिएशन का कहना है कि बैंक के पतन के पीछे बैंक का मैनेजमेंट भी जिम्मेदार है, जिसने 2,000 करोड़ रुपये के लोन रेलीगेयर, जेट एयरवेज, कॉक्स एंड किंग्स, नीरव मोदी ग्रुप, कॉफी डे एंटरप्राइजेज, रिलायंस हाउंसिंग फाइनेंस को दिए।

असल में 18 नवंबर को अचानक खबर आई कि लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने के लिए मॉरेटोरियम लगा दिया गया है और बैंक से निकासी की सीमा घटाकर 25,000 रुपये कर दी गई है। साथ ही लक्ष्मी विलास बैंक का विलय डीबीएस इंडिया के साथ कराया जाना है। इसके पहले यस बैंक और पीएमसी बैंक में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल चुकी है। दोनों बैंक डूबने के कगार पर आ गए थे।

आरबीआई की भूमिका की भी जांच हो

एसोसिएशन की मांग है कि मामले की जांच के दौरान आरबीआई की भूमिका को भी परखा जाना चाहिए। जब आरबीआई को पता था कि बैंक लगातार घाटे में है तो उसने सुरक्षात्मक कदम क्यों नहीं उठाए। एसोसिएशन का मानना है कि आरबीआई बैंकों का डॉक्टर है। उसको पता होता है कि किस मरीज को किस दवा की जरूरत है। लेकिन लक्ष्मी विलास बैंक का आरबीआई ने सीधा डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया। आरबीआई ने बैंक के बोर्ड को एक महीने के लिए दरकिनार कर कैनरा बैंक के पूर्व नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन टीनएन मनोहरन को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया है।

1926 में खोला गया था बैंक

एडमिनिस्ट्रेटर के अनुसार फिलहाल बैंक में 4100 कर्मचारी हैं और बैंक की 563 ब्रांच कामकाज कर रही हैं। पिछले सालों में बैंक को भारी घाटे की वजह से एसेट क्वालिटी पर असर हुआ है। बैंक को सितंबर 2019 में प्रॉम्प्ट करेक्टिन एक्शन में डाला गया था। लक्ष्मी विलास बैंक की स्थापना 1926 में तमिलनाडु में हुई थी। बैंक की महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात और कोलकाता में भी ब्रांच है।

Leave a comment

Your email address will not be published.