नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के बदायूं में सामूहिक बलात्कार पीड़िता के मामले में लापरवाही बरतने वाले थानाधिकारी और चौकी प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अपराध होने के बाद कर्तव्यों का निर्वहन न करने के लिए एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले दोनों को निलंबित कर दिया गया।

बदायूं (ग्रामीण) एसपी सिद्धार्थ वर्मा के अनुसार जांच के दौरान पता चला कि पुलिसकर्मियों ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की। महिला से जुड़े अपराध में कुछ निश्चित कर्तव्यों को पूरा करने की जरूरत होती है लेकिन इस मामले में सभी औपचारिकताओं को पूरा करने में काफी देर की गई। एफआईआर दर्ज करने में लगभग 18 घंटे की देरी की गई।

पुलिस हरकत में आ जाती तो बच सकती थी महिला की जान 

परिवार का आरोप है कि समय पर पुलिस हरकत में आ जाती तो महिला की जान बच सकती थी। आरोप है कि तीन जनवरी की शाम महिला मंदिर में पूजा करने गई थीं। इस दौरान मंदिर में मौजूद महंत सत्य नारायण, चेला वेदराम व ड्राइवर जसपाल ने महिला से सामूहिक बलात्कार किया और उसी रात अपनी गाड़ी से महिला को उनके घर के सामने फेंककर फरार हो गए।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड जैसी चीज डालने की पुष्टि हुई है। महिला के शरीर पर चोट के गंभीर निशान भी मिले। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पसली, पैर और फेफड़े भी क्षतिग्रस्त होने की भी पुष्टि हुई। महिला की मौत सदमे और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से हुई थी। गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में लापरवाही बरतने और घटना को दबाने के मामले में थानाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह को पहले ही निलंबित कर दिया गया। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद फरार मुख्य आरोपी महंत को सात जनवरी की देर रात गिरफ्तार कर लिया गया।

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