नई दिल्ली. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए भारत और चीनी सैन्य कमांडरों के बीच आठवें दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।
सैन्य कमांडरों के बीच आठवें दौर की वार्ता भारतीय सीमा क्षेत्र के चुशूल में करीब दस घंटे चली बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया और तय हुआ कि जल्द ही फिर से वार्ता होगी।
वार्ता समाप्त होने के करीब 48 घंटे बाद रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया कि दोनों पक्षों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव तथा गतिरोध समाप्त करने के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण तथा विस्तार से बातचीत हुई। सहमति बनी कि अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिक संयम बरतेंगे और गलतफहमी तथा नासमझी से बचेंगे।
बीजिंग और नई दिल्ली में जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों से वार्ता एवं संवाद बनाए रखने और पुराने मसलों के समाधान के लिए वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख में टकराव के सभी बिंदुओं से चीन द्वारा बलों की शीघ्र वापसी पर जोर दिया। पूर्वी लद्दाख के विभिन्न पहाड़ी इलाकों में करीब 50 हजार भारतीय सैनिक शून्य से भी नीचे तापमान में युद्ध की उच्चस्तरीय तैयारी के साथ तैनात हैं। चीन ने भी लगभग इतने ही सैनिक तैनात किए हैं। दोनों पक्षों के बीच मई की शुरुआत में गतिरोध की स्थिति बनी थी। आठवें दौर की सैन्य बातचीत में भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के नवनियुक्त कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया था।

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