स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली. संसद की एक समिति ने रहस्योदघाटन किया है कि केन्द्र और राज्यों की सरकारें मिलावटी वस्तुओं के व्यापार पर लगाम डालने में नाकाम है। समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस सच से पर्दा उठाते हुए कारण बताया कि जिस पैमाने पर मिलावटी वस्तुओं का व्यापार जोर पकड़ रहा है, केन्द्र और राज्यों की सरकारों के पास निरस्त लाइसेंसों की संख्या की जानकारी उतनी ही कम है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति ने खाद्य नियामक एफएसएसएआई से कहा है कि वह खाद्य सुरक्षा में भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण को रोकने के लिए राज्यों व प्रदेशों पर दबाव बनाए। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के कामकाज से संबंधित रिपोर्ट जारी करते हुए समिति ने अनैतिक आचरण रोकने के लिए एफएसएसएआई की ओर से किए जा रहे उपायों का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि वह भ्रष्ट आचरण पर कुछ हद तक काबू पाने में सफल रहेगा।

रिपोर्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले बढ़ रहे हैं। समिति को लगता है कि कुछ कड़े कदम उठाने की जरूरत है। अपनी सिफारिशें दोहराते हुए समिति एफएसएसएआई से राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों पर इस बात का दबाव बनाने का आग्रह करती है कि वे खाद्य सुरक्षा के मामलों में भ्रष्टाचार को गंभीरता से लें।

समिति ने खाद्य सुरक्षा निगरानी तंत्र के बारे में आशंकाओं का जिक्र भी किया है। समिति ने कहा है कि देश में आजकल खाद्य पदार्थों में मिलावट की बढ़ती मात्रा के मुकाबले राज्यों और केंद्र के पास निरस्त लाइसेंसों की संख्या बहुत कम है। खाद्य सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन करने वालों को समय पर और उचित सजा देना जरूरी है। इन अपराधों के लिए सजा को बढ़ाने की जरूरत भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून और न्याय मंत्रालय जल्द से जल्द समस्या का हल ढूंढेंगे।

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