पार्षद से शुरू किया था राजनीतिक सफर

नई दिल्ली. कांग्रेस के एक और बुजुर्ग नेता मोतीलाल वोरा का जन्मदिन के दूसरे दिन सोमवार को 93 साल की उम्र में निधन हो गया। एक दिन पहले रविवार को ही उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया था।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले मोतीलाल वोरा दो बार अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और केंद्र में मंत्री रह चुके थे। उनके बेटे अरुण वोरा दुर्ग से विधायक हैं। वोरा के निधन पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वोरा जी सच्चे कांग्रेसी और जबर्दस्त इंसान थे। उनकी कमी बहुत खलेगी। उनके परिवार से साथ मेरी संवेदनाएं हैं।

कांग्रेस पार्टी में 18 सालों तक कोषाध्यक्ष का पद संभालने वाले वोरा 20 दिसंबर 1928 को राजस्थान के नागौर के निंबी जोधा में पैदा हुए थे। मोतीलाल वोरा की आरंभिक पढ़ाई मध्यप्रांत के रायपुर और फिर कोलकाता में हुई थी। उन्होंने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की और कुछ अख़बारों में काम करने के बाद वे राजनीति में आ गए।

1968 में पहली बार दुर्ग से पार्षद का चुनाव लड़ा और उसके चार साल बाद 1972 में पहली बार विधानसभा में पहुंचे। वे 1977 और 1980 में भी विधायक चुने गए। 1985 में उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला। 1988 में उन्हें केंद्र में स्वास्थ्य-परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया। 1993 में वे उत्तरप्रदेश के राज्यपाल बनाये गये। बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वे 2000 से 2018 तक कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे।

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