सुभाष राज

नई दिल्ली. उत्तर भारत का एक बड़ा हिस्सा हर साल की तरह इस वर्ष भी मच्छरों के आतंक से जूझ रहा है। राजस्थान सहित कई राज्यों में मलेरिया के साथ डेंगू कहर बरपा रहा है। हालांकि राज्य सरकारों का दावा है कि वे मच्छरों पर काबू पाने के उपाय कर रही हैं, लेकिन लगता है कि शायद वे नाकाफी साबित हो रहे हैं। अब बात आई पर्सनल स्तर पर मच्छरों से निपटने की तो मच्छरनाशक लोशन लगी मच्छरदानी समेत अनेक तरह के मच्छर नाशक प्रचलन में हैं।

आपने देखा होगा कि इसके बावजूद इक्का-दुक्का मच्छर आपको डंक मारने आ ही जाते हैं। क्यों आ जाते हैं, इसका जवाब इस खबर को पढ़ने पर मिलेगा।

विज्ञान ने दावा किया है कि मच्छर ऐसे लोगों को तत्काल ढूंढ निकालते हैं, जिनके बदन से तीखी गंध आती है। इस गंध को मच्छर दूर से ही महसूस कर लेते हैं और भले ही गहन अंधेरा हो, उसे ढूंढ निकालते हैं।

एक अमेरिकन विश्वविद्यालय के न्यूरोबायोलॉजिस्ट ने सार्वजनिक दावा किया है कि जिनके शरीर से तीखी और मादक गंध है, उनके शरीर मच्छरों के लिए पर्यटक स्थल सरीखे होते हैं। इस गंध का अहसास होते ही मच्छर हर हालत में वहां पहुंचने की जद्दोजहद में जुट जाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो तीखी गंध मच्छरों को उसी तरह अपनी ओर खींच लेती है, जैसे चुम्बक लोहे को खींचती है।

जिनके शरीर की गंध ने मच्छरों को ज्यादा आकर्षित किया, उनके बदन पर रिसर्च के दौरान एक खास तरह का चिपचिपा पदार्थ पाया गया। असल में कुछ घंटों का जीवन जीने वाले मच्छर हर हालत में सर्वाइव कर जाते हैं।

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