नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए बदलाव की ज़रूरत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहां है?

मोदी ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर वे वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहते हैं। भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डेलिवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी। महामारी के मुश्किल समय में भी भारत के दवा उद्योग ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां भेजीं हैं।
आतंकवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आवाज़ मानवता, मानव जाति और मानवीय मूल्यों के दुश्मन-आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मनी लाउंडरिंग के खिलाफ उठेगी।
मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र में सुधार का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने की व्यवस्था से अलग रखा जाएगा। एक ऐसा देश, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। एक ऐसा देश जहां विश्व की 18 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है। एक ऐसा देश जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अनेकों पंथ हैं, अनेकों विचारधाराएं हैं।

जिस देश ने वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने और वर्षों की गुलामी को जिया है। जिस देश में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर पड़ता है। उस देश को आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा?
आज भारत अपने गांवों के 150 मिलियन घरों में पाइप से पीने का पानी पहुंचाने का अभियान चला रहा है। कुछ दिन पहले ही भारत ने अपने 6 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट करने की बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए भारत ने बड़े स्तर पर प्रयास किया। भारत उन देशों में से एक है जहां महिलाओं को 26 हफ्ते की पेड मैटरनिटी छुट्टी दी जा रही है।

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