सुभाष राज

नई दिल्ली. दूरसंचार नियामक ट्राई ने मोबाइल के प्रीपेड ग्राहकों के महीने को फिर से तीस दिन का ​कर दिया है। भारत के मोबाइल सर्विस प्रोवाइडरों ने बेहद चालाकी के साथ इसे चार सप्ताह अर्थात 28 में बदल दिया था और सर्विस पैक बेचते समय ग्राहकों को पिछले दो दशकों से चूना लगा रही थीं।

ट्राई ने प्रीपेड उपयोगकर्ताओं के लिए 30-दिवसीय “मासिक” रिचार्ज योजना लागू करने को कहा है। ट्राई ने पिछले साल इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया था। लेकिन उसे दूरसंचार ऑपरेटरों और उनके समर्थक समूहों के साथ सीओएआई के विरोध का सामना करना पड़ा। इस आदेश के बाद प्रीपेड रिचार्ज 13 महीनों की अपेक्षा वर्ष में 12 महीनों का हो जाएगा।

2022 के लिए अपने पहले आदेश में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने दूरसंचार कंपनियों को 30 दिनों की वैधता के साथ “कम से कम एक योजना वाउचर, एक विशेष टैरिफ वाउचर और एक कॉम्बो वाउचर” की पेशकश करने का निर्देश दिया है। आदेश में इसके नवीनीकरण की भी एक ही तारीख तय करने को कहा गया है।

ट्राई के आदेश की अधिकांश दूरसंचार ऑपरेटरों और समर्थकों के साथ सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने खिलाफत की और बेहद बचकाना तर्क दिया कि 28-दिन की वैधता की प्रथा दशकों पुरानी है और उपभोक्ता इससे अच्छी तरह वाकिफ हैं।

जबकि उपभोक्ता समर्थन समूहों ने उपभोक्ता सुविधा का हवाला देते हुए 30-दिवसीय प्रस्ताव पर जोर दिया। प्रीपेड उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की है कि दूरसंचार आपरेटरों की रीचार्ज योजनाएं उन्हें 12 महीने होने के बावजूद साल में 13 बार रिचार्ज करने के लिए मजबूर करती हैं।

इसी तरह के 28-दिवसीय प्लान की तुलना में 2 दिनों के लिए आनुपातिक रूप से कीमत बढ़ाने के बाद टेलीकॉम ऑपरेटर तकनीकी रूप से ट्राई द्वारा 30-दिन की योजना की पेशकश कर सकते हैं।

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