पत्रकार अर्नब की गिरफ्तारी पर शिवसेना की सफाई

नई दिल्ली. शिवसेना ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है जिनमें रिपब्लिक टीवी के सम्पादक अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी को बदले की कार्रवाई बताया गया है। शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून का राज है और प्रोफेशनल पुलिस को कोई सबूत मिला होगा तभी उसने अर्नब को गिरफ्तार किया होगा।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई का महाराष्ट्र सरकार से कोई संबंध नहीं है। महाराष्ट्र की सरकार कभी भी बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करती। महाराष्ट्र में क़ानून का राज है। यहां किसी तरह की अराजकता नहीं है। पुलिस प्रोफेशनल है। उनके पास अगर कोई जांच का मामला है और अगर उनके हाथ कोई सबूत लगा होगा तो पुलिस किसी पर भी कार्रवाई कर सकती है।

चैनल ने लगाए थे झूठे आरोप !

उन्होंने कहा कि इस चैनल ने हम सब के ख़िलाफ़ बदनामी का एक अभियान चलाया था और झूठे आरोप लगाए थे, लेकिन हमने कहा कि झूठे इलज़ाम लगाने वालों की भी जांच होनी चाहिए। संजय राउत ने कहा,सर्वोच्च न्यायालय ने इस चैनल के बारे में महत्वपूर्ण निरीक्षण दिया था कि आप न्यायालय नहीं हो, जांच एजेंसी नहीं हो, इसलिए आप किसी के ख़िलाफ़ कुछ भी ग़लत-सलत बोलकर लोगों को बहकावे में नहीं ला सकते। संजय राउत ने सवाल किया कि ये हमारा निरीक्षण नहीं है बल्कि सर्वोच्च न्यायालय का है, तो क्या आप सर्वोच्च न्यायालय से भी कहेंगे कि ये काला दिन है? उन्होंने कहा कि चाहे कोई पत्रकार हो, राजनेता हो, एक्टर हो या चाहे वकील हो, अगर किसी ने ग़लत काम नहीं किया है तो ज़ोर से चिल्लाने की ज़रूरत नहीं है।

आर्किटेक्ट का भुगतान नहीं करने का आरोप

पुलिस के अनुसार 2018 में एक आर्किटेक्ट और उनकी मां ने कथित तौर पर गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी द्वारा उनके बकाया का भुगतान न किए जाने के कारण आत्महत्या कर लेने का आरोप लगाया था। अदन्या ने आरोप लगाया है कि अलीबाग पुलिस ने गोस्वामी के चैनल द्वारा बकाया भुगतान ना करने के मामले में जांच नहीं की। उसका दावा है कि इस कारण ही उसके पिता और दादी ने मई 2018 में आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अलीबाग पुलिस की एक टीम ने गोस्वामी को यहां उनके घर से गिरफ्तार किया।

आपातकाल की याद ताजा

उधर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी को प्रेस की आजादी पर हमला करार देते हुए कहा है कि इससे आपातकाल की याद ताजा हो गयी है।
गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार किया है। रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ राज्य शक्ति का दुरूपयोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। यह हमें आपातकाल की याद दिलाता है। स्वतंत्र प्रेस पर हमले का विरोध किया जाना चाहिए और किया जाएगा।

ये है मामला

पुलिस का कहना है कि अर्नब गोस्वामी को कथित तौर पर 53 साल के एक इंटीरियर डिज़ाइनर की आत्महत्या के मामले में गिरफ़्तार किया गया है।

बंद हो चुका था केस

मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को आत्महत्या के लिए उकसाने के 2018 के एक मामले में आईपीसी की धारा 306 के तहत गिरफ़्तार किया है। रिपब्किल टीवी के मुताबिक़ ये केस बंद हो चुका था, जिसे दोबारा खोला गया है। हालांकि पुलिस ने अब तक नहीं बताया है कि कार्रवाई किस मामले में हुई है। माना जा रहा है कि अर्नब की गिरफ़्तारी का मामला एक मराठी इंटीरियर डिज़ानइर अन्वय नाइक की कथित आत्महत्या से जुड़ा है। मई 2018 में कथित तौर पर आत्महत्या से पहले लिखे एक ख़त में आरोप लगाया था कि अर्नब गोस्वामी ने रिपब्लिक नेटवर्क के स्टूडियो का इंटीरियर डिज़ाइन कराने के बाद भुगतान नहीं किया था।

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