नई दिल्ली. मुर्गा खाने वालों की पहली पसंद कड़कनाथ फिर संकट में है। बर्ड फ्लू प्रकोप के चलते उसके हजारों चूजों को नष्ट किया जा रहा है। इससे पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहे कड़कनाथ पर दोहरी मार पड़ रही है।

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में बड़ी संख्या में पाया जाने वाला काले रंग का कड़कनाथ अपने काले खून के लिए प्रसिद्ध है। इस मुर्गे को काटने पर लाल नहीं बल्कि काला खून निकलता है। इसी के चलते मुर्गा खाने वालों में ये भ्रांति फैली हुई है कि उसे खाने से यौन शक्ति में इजाफा होता है और इसी वजह से वह पिछले कई वर्षों से अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में झाबुआ के कड़कनाथ में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इसके चलते संक्रमित क्षेत्र में आगामी तीन माह तक के लिए कुक्कुट के व्यापार और परिवहन पर रोक लगा दी गई है। झाबुआ जिले के गांव रूंडीपाड़ा में कड़कनाथ मुर्गी में एच5एन1 वायरस मिला है। इसी वजह से जिला प्रशासन ने चारा-दाना, अंडे आदि को नष्ट और प्रभावित स्थल को सेनिटाइज और डिसइन्फेक्ट करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित स्थल से एक किलोमीटर की परिधि को संक्रमित क्षेत्र मानते हुए सभी प्रकार के कुक्कुट को मार दिया जाएगा। एक से नौ किलोमीटर की परिधि को सर्विलांस जोन मानते हुए सेम्पल लिए जाएंगे। संक्रमित क्षेत्र में अगले तीन माह तक कुक्कुट और कुक्कुट उत्पाद की रिस्टॉकिंग और कुक्कुट परिवहन पर प्रतिबंध रहेगा।

जानकारी के अनुसार झाबुआ के थांदला क्षेत्र के रूंपीपाड़ा स्थिति विनेद के फार्म हाउस में मृत कड़कनाथ के शव के जांच के लिए भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आ गई है। रूंडीपाड़ा के फार्म में बड़ी संख्या में कुक्कुट सामग्री को नष्ट कर दफनाया जाएगा। प्रशासन नष्ट अवशेषों को गड्ढे में दफना कर चूना डालकर कांटे बिछाएगा।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के 19 जिलों में बर्डफ्लू पाया गया है। इंदौर, मंदसौर, आगर, नीमच, देवास, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, गुना, शिवपुरी, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, भोपाल, होशंगाबाद, अशोकनगर, दतिया और बड़वानी में एच5एन8 की पुष्टि हुई है। प्रदेश के 42 जिलों से लगभग 2100 कौवों और जंगली पक्षियों की मृत्यु की सूचना मिली है।

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