सीबीआई की मांग

नई दिल्ली. राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ने दावा किया है कि चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव के गुर्दे पूरी तरह ठीक हैं और उनके स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है। इस बीच उनका इलाज करने वाले चिकित्सक डॉ. उमेश प्रसाद को बयानबाजी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

झारखंड के कारा महानिरीक्षक वीरेन्द्र भूषण के अनुसार लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य स्थिर है। इससे पूर्व लालू प्रसाद यादव के चिकित्सक डॉ. उमेश प्रसाद के हवाले से कुछ टीवी चैनलों और अखबारों ने खबर दी थी कि लालू के गुर्दे केवल 25 प्रतिशत क्षमता से काम कर रहे हैं। रिम्स निदेशक के अनुसार लालू यादव का स्वास्थ्य ठीक है।

ज्ञात रहे कि लालू यादव की जमानत याचिका पर 11 दिसंबर को होने वाली सुनवाई से ठीक पूर्व सीबीआई ने 10 दिसंबर को पूरक शपथ पत्र दाखिल कर कहा था कि लालू ने जेल नियमावली का उल्लंघन किया है इसलिए उन्हें रिम्स से बिरसा मुंडा जेल भेज देना चाहिए। सीबीआई के शपथ पत्र से लालू की जमानत पर फैसला टाल दिया गया था। लालू की जमानत का मामला न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। उधर न्यायिक हिरासत से भाजपा विधायक को किये गये फोन प्रकरण में लालू के खिलाफ पटना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इससे पूर्व लालू की जमानत याचिका पर 27 नवंबर को उच्च न्यायालय में बहस के दौरान दुमका कोषागार से गबन के मामले में लालू द्वारा न्यायिक हिरासत में बितायी गयी अवधि को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद न्यायालय ने लालू के अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सीबीआई दोनों को ही न्यायिक हिरासत की अवधि की जांच निचली अदालत के रिकॉर्ड से करने के निर्देश दिये। सीबीआई के मुताबिक लालू प्रसाद यादव ने 34 महीने जेल में बिताए हैं जबकि सिब्बल का दावा है कि यह अवधि 42 महीने 28 दिन है। कपिल सिब्बल ने लालू प्रसाद की न्यायिक हिरासत में 42 माह, 28 दिनों की हिरासत साबित करने के लिए समय मांगा था, लेकिन 11 दिसंबर को सुनवाई के दौरान भी लालू के वकीलों के समय मांगने के कारण उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई अब 22 जनवरी अथवा उसके बाद होगी।

उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने कहा कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा-427 के तहत सभी मामलों में सजाएं एक के बाद एक चलनी चाहिए और उस लिहाज से दुमका मामले में अब तक लालू यादव ने न्यायिक हिरासत में एक दिन भी नहीं बिताया है। लालू को दुमका मामले में भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत सात वर्ष कैद एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी सात वर्ष कैद की सजा सुनायी गयी है जिसे मिलाकर उनकी इस मामले में कुल सजा 14 वर्ष की हो जाती है। इस मामले में जमानत मिलने पर लालू लगभग तीन वर्ष बाद जेल से बाहर आ सकेंगे क्योंकि अब तक चारा घोटाले के जिन चार मामलों में लालू प्रसाद यादव को सजा सुनायी गयी है उनमें से तीन में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।

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