नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड मामले में उम्र कैद की सजा भुगत रहे एजी पेरारिवलन की इलाज के लिये पेरोल अवधि एक सप्ताह के लिये बढ़ा दी है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने कहा कि न्यायालय ने 23 नवंबर को पेरोल की अवधि एक सप्ताह के लिये बढ़ाई थी और सरकार को पेरारिवलन के लिए सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया था।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने बीमारी के इलाज के लिये एक आवेदन में 90 दिन की पेरोल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है क्योंकि उसकी सर्जरी होनी है। आवेदक की पेरोल की अवधि एक सप्ताह के लिये बढ़ाई जाती है। पीठ ने कहा कि पेरोल की अवधि आखिरी बार बढ़ाई जा रही है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि डॉक्टर के पास जाने के लिये पेरारिवलन को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ।

पेरारिवलन को पहली बार नौ से 23 नवंबर तक के लिये मद्रास उच्च न्यायालय ने इलाज के लिये पेरोल दिया था जिसकी अवधि शीर्ष अदालत ने बढ़ा दी थी। पेरारिवलन का गुर्दा 25 प्रतिशत काम नहीं कर रहा है और उसे ऑपरेशन की जरूरत है। पीठ ने शंकरनारायणन से कहा कि वह 90 दिन की पेरोल चाहता है तो वरिष्ठ अधिवक्ता ने जवाब दिया कि उन्हें तीन महीने की पेरोल की मांग नहीं करनी चाहिए थी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता सरकार से यह अनुरोध क्यों नहीं करता क्योंकि सरकार ने ही उसकी रिहाई की सिफारिश की है। शंकरनारायणन ने कहा कि यह शायद उचित नहीं होगा क्योंकि पिछली बार इस न्यायालय ने पेरोल की अवधि बढ़ाई थी। श्रीनिवासन ने कहा कि संबंधित नियमों के अनुसार पेरारिवलन हर दो साल में 30 दिन की पेरोल का हकदार है लेकिन अभी तक वह 51 दिन का पेरोल ले चुका है।

उन्होंने कहा कि पेरारिवलन 25 किमी दूर स्थित सीएमसी वेल्लोर नहीं बल्कि यहां से 200 किमी दूर स्थित अस्पताल जाना चाहता है। न्यायालय ने 23 नवंबर को पेरारिवलन की पैरोल की अवधि एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी ताकि वह अपनी डॉक्टरी जांच करा सके। इससे पहले, 20 नवंबर को न्यायालय में दाखिल हलफनामे में सीबीआई ने कहा था कि पेरारिवलन को माफी देने के मुद्दे पर तमिलनाडु के राज्यपाल को फैसला करना है। न्यायालय ने तीन नवंबर को सुनवाई के दौरान राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी पेरारिवलन की सजा माफी की याचिका तमिलनाडु के राज्यपाल के पास दो साल से भी ज्यादा समय से लंबित होने पर नाराजगी व्यक्त की थी।

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