नई दिल्ली. कश्मीर में एक साल में आतंकी घटनाओं में जितने नागरिक जान गंवाते हैं, उससे डेढ़ गुना ज्यादा लोगों के प्राण श्रीनगर-जम्मू हाई-वे ले लेता है।

270 किलोमीटर लंबे हाई-वे पर हर साल सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। 2019 में कश्मीर की आतंकी हिंसा में 366 लोगों की मौत हुई, जबकि इस हाई-वे पर 447 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। हाई-वे के उत्तरी इलाके में उधमपुर के आसपास 252 और दक्षिण के रामभन इलाके में 195 लोग मारे गए।

असल में पहाड़ों से सटी होने के कारण ये सड़क बेहद तंग है। सड़क पर क्षमता से ज्यादा वाहन दौड़ते हैं। इससे यहां रोज जाम लगता है। सैन्य वाहनों को सामान्य वाहनों के मुकाबले पहले निकाला जाता है। इससे प्रतिदिन कई किलोमीटर लम्बा जाम लगता है। 2019 में सीआरपीएफ काफिले पर पुलवामा हमले के बाद सरकार ने फैसला किया कि हर सप्ताह सेना के वाहनों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए इस हाई-वे को दो दिन बंद रखा जाएगा और इस पर सिर्फ सैन्य वाहनों की आवाजाही होगी।

ये हाई-वे कई ऐसी जगहों से गुजरता है जहां पहाड़ की मिट्टी पक्की नहीं है। इन पहाड़ों को सड़क चौड़ी करने के लिए तोड़ा जाता है। हजारों की संख्या में आम और सैन्य वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। सड़क का इस्तेमाल क्षमता से ज्यादा किया जा रहा है। सड़क सर्दियों में खराब मौसम और बर्फबारी की वजह से अक्सर बंद हो जाती है।

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