राज्यपाल ने रोके तीन कृषि विधेयक

जयपुर. केन्द्र राज्य सम्बंधों पर अक्सर उठने वाले सवालों के केन्द्र में रहने वाले राज्यपालों में से एक राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र और अशोक गहलोत सरकार फिर आमने-सामने हो सकते हैं। राज्यपाल ने उन तीन कृषि विधेयकों को रोक दिया है जिन्हें केन्द्र के कृषि विधेयकों के विरोध में राजस्थान विधानसभा ने पारित किया था।

राज्यपाल मिश्र और मुख्यमंत्री गहलोत विधानसभा का विश्वासमत सत्र बुलाने को लेकर पूर्व में भी टकरा चुके हैं। पिछले कई माह से मोदी सरकार की ओर से विपक्ष शासित राज्यों में नियुक्त राज्यपालों पर संवैधानिक मर्यादाओं से इतर फैसले लेने और टिप्पणियां करने के आरोप लग रहे हैं। जिनमें हाल ही महाराष्ट्र के राज्यपाल की वहां के मुख्यमंत्री पर की गई राजनीतिक टिप्पणी से खासा बवाल हो गया था।

जिन विधेयकों को राज्यपाल ने रोका है, उन्हें मोदी सरकार और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक जंग में तुरुप के इक्के की तरह इस्तेमाल किया जाना था। यहां यह बता देना समीचीन होगा कि मोदी सरकार ने संविधान की राज्य सूची के विषय कृषि पर बनाए विधेयकों में राज्यों की चिंताओं को कोई स्थान नहीं दिया है। इसी के चलते राजस्थान समेत कई अन्य राज्यों ने विधानसभाओं को हासिल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने के अधिकार का इस्तेमाल किया है। इन विधेयकों के जरिए वे अपने राज्यों में केन्द्रीय कानूनों का अमल रोकना चाहते हैं।

वैसे संविधान में प्रावधान है कि अगर विवाद की स्थिति में राज्य सूची के विषयों पर केन्द्र कानून बनाएगा तो राज्यों को उसकी पालना करनी ही होगी। हालांकि केन्द्र राज्य सम्बंधों की व्याख्या करने वाले सरकारिया आयोग ने स्पष्ट किया हुआ है कि अगर बहुत अधिक आवश्यक नहीं हो तो केन्द्र को राज्य सूची में शामिल विषयों पर कानून नहीं बनाने चाहिए।

एक समाचार एजेंसी के हवाले से मीडिया में आई खबरों के अनुसार राज्यपाल ने जिन तीन विधेयकों को रोका है, उनमें कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) राजस्थान संशोधन विधेयक 2020 में किसान के उत्पीड़न पर सात साल जेल की सजा और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार राजस्थान संशोधन विधेयक में संविदा खेती को लेकर कड़े प्रावधान है। उसमें किसान से एमएसपी से कम पर संविदा खेती का करार मान्य नहीं होने और एमएसपी से कम पर करार करने को बाध्य करने पर सात साल तक सजा और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है। तीसरे आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 के तहत सरकार को कृषि वस्तुओं पर स्टॉक सीमा लगाने का अधिकार मिलेगा।

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