अणर्ब पर सबने स्यापा किया, कप्पन की किसी को याद नहीं

नई दिल्ली. रिपब्लिकन टीवी के मालिक और सम्पादक अर्णव गोस्वामी की गिरफ्तारी के साथ ही उन पत्रकारों के मामले भी सतह पर आ गए हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद अपने वकीलों से बात भी नहीं करने दी जा रही है। ऐसे ही पत्रकारों में से एक है पत्रकार सिद्दीक कप्पन, जिनकी जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 16 नवम्बर को सुनवाई होगी। 5 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीक कप्पन हाथरस में सामूहिक बलात्कार की पीड़िता के परिवार के सदस्यों से मिलने उनके गांव जा रहे थे। उनके साथ अतीक-उर-रहमान, मसूद अहमद और आलम नामक तीन एक्टिविस्टों को भी गिरफ्तार किया गया था और चारों के मोबाइल, लैपटॉप और कुछ साहित्य को जब्त कर लिया गया। पुलिस का दावा है कि चारों पॉपूलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) नामक संस्था के सदस्य हैं।

पत्रकारों की यूनियन का सचिव भी है कप्पन

पुलिस के इन आरोपों का जवाब केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (केयूडब्लयूजे) ने दिया और कहा कि सिद्दीक कप्पन पत्रकार हैं और संगठन की दिल्ली इकाई के सचिव भी हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें वकीलों से नहीं मिलने दिया। यहां ये उल्लेखनीय है कि कप्पन के पीएफआई के सदस्य होने का सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह), 153ए (दो समूहों के बीच शत्रुता फैलाना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करना), यूएपीए और आईटी अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। जाति के आधार पर दंगे भड़काने की साजिश और राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश के आरोप भी बाद में चस्पा कर दिए गए।

खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

कप्पन की पैरवी के लिए केयूडब्लयूजे की ओर से नियुक्त वकील विल्स मैथ्यूज के अनुसार उत्तर प्रदेश प्रशासन ने कप्पन से मिलने और फोन पर बात करने की अनुमति नहीं दी। यह पूरी तरह से गैर कानूनी है क्योंकि हर आरोपी को अपने वकील से मिलने का पूरा अधिकार होता है। कप्पन को 90 वर्षीया मां, पत्नी और उनके बच्चों से भी बात करने की अनुमति नहीं दी गई। बहुत चिरौरी करने पर सिर्फ एक बार मां से बात कराई गई। उत्तरप्रदेश पुलिस के इस रवैये को देखते हुए केयूडब्लयूजे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने छह नवंबर को उनकी याचिका पर सुनवाई की पहली तारीख तय की। सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

योगी को याद नहीं कितने पत्रकार बंद हैं उनकी जेलों में

मजे की बात ये कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी की निंदा करते समय ये याद नहीं रहा कि उनके प्रदेश में पत्रकारों की आवाज को दबाने का अभियान चल रहा है और अनेक पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें हिरासत में रखा जा रहा है।

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