नई दिल्ली. एमबीए, एमसीए, बीटेक, एमटेक और अन्य तकनीकी डिग्रियां भारत में नौकरी मिलने की गारंटी के तौर पर देखी जाती हैं, लेकिन अब ये डिग्रियां उच्च स्तर की नौकरियों की अपेक्षा कांस्टेबल की नौकरी दिला रही हैं। जी हां, रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ में भर्ती हुई महिला कांस्टेबलों में से ज्यादातर ऐसी हैं, जिनके पास बीए और एमए जैसी ही नहीं बल्कि एमबीए, एमसीए, बीटेक, एमटेक और अन्य तकनीकी डिग्रियां हैं। जबकि इस पद के लिए सिर्फ बारहवीं तक की डिग्री की जरूरत होती है।

आरपीएफ की नवनियुक्त 248 महिला कांस्टेबल राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, यूपी, पश्चिमी बंगाल, हरियाणा और छतीसगढ़ राज्यों से हैं। ट्रेनिंग सेंटर में महिला प्रशिक्षुओं को एसएलआर, इंसास, एलएमजी, एआरएम जैसे अत्याधुनिक हथियार चलाना सिखाया गया। आरपीएफ में बतौर कांस्टेबल चयनित हुई सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक कविता सिन्हा का कहना था कि यह शुरुआत है। नौकरी की जरूरत थी। भर्ती का आवेदन निकला तो आवेदन कर दिया। ज्यादातर महिला कांस्टेबल का यही कहना है कि यह उनकी शुरुआत है और आगे बेहतर नौकरी मिली तो उसे छोड़कर अच्छी वाली नौकरी कर लेंगी।

लखनऊ में यूपी पुलिस में महिला कांस्टेबल की परीक्षा देने के बाद रिजेक्ट हो चुकी शालिनी सिंह के अनुसार उच्च शिक्षित लोगों का इन परीक्षाओं के लिए आवेदन ठीक नहीं है। इससे अन्य अभ्यर्थियों का नुकसान होता है। जो बहुत पढ़े-लिखे लोग हैं, वो लिखित परीक्षा आसानी से पास कर लेते हैं जबकि केवल इंटर तक पढ़े लोग कांस्टेबल भर्ती की ही तैयारी करते हैं और शारीरिक तैयारी पर ज्यादा जोर देते हैं। एमबीए-एमसीए और बीटेक-एमटेक लोग कम पढ़े लोगों से अच्छा परफॉर्म करते हैं और निकल जाते हैं।

इससे पहले यूपी में सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और जिलों में सफाई कर्मचारियों के लिए निकले आवेदन में हजारों की संख्या में उच्च शिक्षित लोग चयनित हो चुके हैं। करियर काउंसिलर राजीव सक्सेना के अनुसार कोई इंजीनियर और एमबीए कांस्टेबल या सफाई कर्मचारी नहीं बनना चाहता है लेकिन बेरोजगारी कुछ भी करा सकती है। इंजीनियरिंग कॉलेज और मैनेजमेंट कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह खुले हैं और चार साल की पढ़ाई के दौरान करीब आठ-दस लाख रुपये खर्च कराते हैं लेकिन बाहर निकलने पर उन्हें 15-20 हजार रुपये प्रति माह की नौकरी भी नहीं मिल पा रही है।

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