नई दिल्ली. अरुणाचल में जेडीयू विधायकों के भाजपा में चले जाने से उत्पन्न गतिरोध का फायदा उठाने के लिए राष्ट्रीय जनता दल मैदान में आया है। उसने दावा किया है कि बिहार में जदयू के 17 विधायक उसके सम्पर्क में है। वे विधायक चाहते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल उन्हें अपना लें। इससे पहले राजद नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने का न्योता देकर यह चाल चल चुका है कि अगर नी​तीश तेजस्वी को समर्थन देकर उन्हें मुख्यमंत्री बनवा दें तो राजद 2024 में नी​तीश को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन दे सकता है।

राजद के वरिष्ठ नेता श्याम रजक के अनुसार दल-बदल कानून के तहत 17 विधायकों को राजद में नहीं लिया जा सकता क्योंकि जदयू तोड़ने के लिए 25-26 विधायक चाहिए। राजद को इंतजार है कि कुछ और विधायक आ जाएं तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। उनका कहना है कि राजद उन्हीं विधायकों को लेंगे, जो समाजवाद और लालू यादव की विचारधारा पर चलने वाले हों।

इधर पार्टी के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी श्याम रजक के बयान से सहमत नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत बयान है। राजद की जल्द होने वाली बैठक में नीतीश कुमार के साथ सरकार बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। नीतीश अगर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाएं और खुद केंद्र की राजनीति करें तो राजद उनकी मदद करेगा।

उधर रजक के बयान के बाद जदयू ओर से प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि श्याम रजक बिना तथ्य बयान दे रहे हैं। राजद पहले अपने विधायक सम्भाले फिर नीतीश के विधायकों की बात करे।

उल्लेखनीय है कि दल-बदल कानून के तहत एक पार्टी को तोड़ने के लिए कम से कम दो तिहाई विधायक होने चाहिए। राजद को जदयू के दो तिहाई विधायकों को तोड़ना पड़ेगा। जदयू के 43 विधायक हैं। इसलिए राजद को कम से कम 28-29 विधायकों को पक्ष में लाना होगा।

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