नई दिल्ली. भारत के सूदखोरों ने चेहरा बदल लिया है। अब वे डिजीटल माध्यम से जरूरतमंदों को अपने जाल में फंसाते हैं और सूद नहीं देने पर आत्महत्या तक के लिए बाध्य कर देते हैं। ये निष्कर्ष रिजर्व बैंक का है जिसने ऐसे सूदखोरों से सावधान रहने के लिए जनजागरण शुरू किया है। बैंक की ओर से मोबाइल फोन पर संदेश भेजे जा रहे हैं कि एप के माध्यम से ऋण के जाल में नहीं फंसे अन्यथा……।

रिजर्व बैंक का कहना है कि डिजिटल लोन देने वाली कई अनाधृकित सेवाओं/ऐप के माध्यम से लोगों और छोटे व्यापारियों को जल्दी और आसान तरीके से लोन देने का वादा किया जाता है। जब कोई इनके जाल में फंस जाता है तो अविश्वसनीय ब्याज दर और छिपे हुए शुल्क मांगे जाते हैं। भुगतान नहीं करने पर इनसे जुड़े लोग लोन दी हुई रकम की जबरन वसूली करते हैं जिससे कई लोगों को आत्महत्या तक करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।

रिजर्व बैंक के अनुसार ये एप अनाधिकृत तरीकों से उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन का डाटा भी हासिल कर लेते हैं। बैंक ने जनता को सावधान किया है कि लोग इस तरह की गतिविधियों का शिकार ना बनें और धोखा खाने से बचने के लिए लोन का प्रस्ताव करने वाली कंपनी की पूरी जांच कर लें। आरबीआई ने कहा है कि ऐसी फर्जी सेवाओं के खिलाफ उसकी वेबसाइट पर शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।

मोबाइल एप के माध्यम से मोटा सूद वसूलने वाले गैंगों का केन्द्र हैदराबाद बताया जा रहा है। हैदराबाद में तीन लोगों की आत्महत्या के बाद पुलिस का पूरे मामले की तरफ ध्यान गया। जांच में पता चला कि कुछ लोग एप के जरिए 35 प्रतिशत तक की ब्याज दर पर तुरंत और आसान लोन दे रहे हैं। बकाया ब्याज ज्यादा हो जाने पर लोन चुकाने में मुश्किल होने पर ये कंपनियां लोगों को वसूली के लिए अलग अलग तरीकों से परेशान कर रही थीं। तीनों आत्महत्याओं के लिए यही उत्पीड़न जिम्मेदार है।

हैदराबाद पुलिस ने इस सिलसिले में हैदराबाद और हरियाणा के गुडगांव से 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को इन लोगों से जुड़े कम से कम 75 बैंक खाते मिले जिनमें 423 करोड़ रुपए जमा हैं। लोन माफिया के रूप में अमेरिका से डिग्री हासिल किए 32 वर्षीय इंजीनियर सरथ चंद्र का नाम सामने आया है।

सरथ ने गुड़गांव, हैदराबाद और बेंगलूरु में कॉल सेंटर भी खोले हुए हैं। इनमें से तीन कॉल सेंटरों में 1,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। उन्हें उपभोक्ताओं को एक के बाद एक आसान लोन के चक्कर में फंसाने और फिर उन्हें परेशान करने और ब्लैकमेल करने की ट्रेनिंग दी जाती है। इस मामले के तार दिल्ली, गाजियाबाद, नागपुर, मुंबई और बेंगलूरु के कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) से जुड़े हुए हैं।

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