सुभाष राज

नई दिल्ली. भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत कुछ ही दिनों में समुद्र में घूमना शुरू कर देगा। वह अगले साल जुलाई तक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। विक्रांत भारत की पूर्वी नौसेना कमान का हिस्सा होगा। इस युद्धपोत की समुद्र में तैनाती के बाद चीन की तरफ से मिल रही चुनौतियों का मुंह तोड़ जवाब दिया जा सकेगा।

लगभग 24,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा आईएनएस विक्रांत बेसिन परीक्षण की स्टेज को सफलता के साथ पार कर चुका है। इस परीक्षण के जरिए विक्रांत के प्रोपलस्न और बिजली उत्पादन प्रणालियों की जांच की गई थी। परीक्षण के बाद नौवहन संचार और परिचालन प्रणालियों का नेवीगेशन भी किया गया। जुलाई में समुद्री ट्रायल के दौरान विक्रांत के ‘मूव’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पानी के अंदर उसकी चाल का अध्ययन किया जाएगा। अगर सब कुछ योजनानुसार चला तो 40,000 टन वजन का ये जहाज जुलाई में दुश्मनों का मुकाबला करने को तैयार हो जाएगा।

इस विमानवाहक पोत की परियोजना फरवरी 2009 शुरू हुई थी। इसे भारतीय नौसेना के नौसेना डिजाइन निदेशालय ने डिजाइन किया है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड इसका निर्माण कर रहा है। ये जटिल युद्धपोत निर्माण परियोजना है जिसे स्वदेश में डिजाइन करके बनाया गया है। आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। इसमें विमानों की उड़ान और लैंडिंग के लिए स्की जंप क्षमता के साथ शॉर्ट टेकऑफ़ लेकिन अरेस्ट रिकवरी का कॉन्फ़िगरेशन भी है। आईएनएस विक्रांत भारतीय नौसेना का सबसे शक्तिशाली समुद्री एसेट होगा। आईएनएस विक्रांत 35 से 40 विमान लेकर चलेगा। इन विमानों में नेवल फाइटर्स, पनडुब्बी रोधी हेलीकाप्टर और नौसेना यूएवी भी शामिल होंगे।

विमान में मिग-29 लड़ाकू विमान, कामोव-31 एयर अर्ली वार्निंग हेलीकॉप्टर, एमएच-60आर बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर और स्वदेशी एडवांस्ड हल्के हेलीकॉप्टर भी तैनात होंगे। यह लंबी दूरी पर एयर पावर को प्रक्षेपित करने की क्षमता से लैस होगा। एयर इंटरडिक्सन, एंटी सरफेस वारफेयर, आक्रामक और रक्षात्मक जवाबी कार्रवाई, हवाई पनडुब्बी रोधी युद्ध इसकी खासियत होगी। इसमें चार 76एमएम की दोहरे इस्तेमाल वाली तोपों के अलावा चार एके 630 क्लोज इन वेपन सिस्टम भी होगा। इसमें दो 32 सेल वीएलएस (वर्टिकल लॉन्च सिस्टम) भी हैं, जो कुल 64 मिसाइल दागने में सक्षम हैं। यह कम दूरी के लिए इजरायली बराक 1 सरफेस से हवा में मार करने वाली मिसाइल और लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और मिसाइलों सहित एरियल टारगेट के खिलाफ लंबी दूरी की रक्षा के लिए बराक 8 से लैस होगा।

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