नई दिल्ली. जम्मू के नगरोटा में मारे गए चार आतंककारियों ने भारत के पूरे सुरक्षा प्रतिष्ठान को हिलाकर कर रख दिया। इसी के चलते पूरे मामले की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को समीक्षा करनी पड़ी।
हालांकि सरकारी सूत्रों ने इसका कारण मुंबई जैसे हमले की साजिश का पर्दाफाश होना बताया लेकिन सुरक्षा सूत्रों ने संकेत दिए कि असल में इस मुठभेड़ में चलते-फिरते बंकर का सामने आना प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप का असल कारण था। करीब तीस साल से घाटी और जम्मू क्षेत्र में आतंककारियों से दो-दो हाथ कर रहे सुरक्षा बलों के जवान नगरोटा मुठभेड़ के दौरान तब हतप्रभ रह गए जब खाद्य सामग्री से भरे एक ट्रक में बैठकर फायरिंग कर रहे आतंककारियों पर उनकी जवाबी फायरिंग का असर नहीं हुआ।
मुकाबला कर रहे सुरक्षाकर्मियों को तत्काल समझ आ गया कि आतंककारियों ने ट्रक को चलते-फिरते बंकर का रूप दे दिया है। हालांकि ट्रक को विस्फोट से उड़ा दिया गया लेकिन इसने सुरक्षा​ अधिकारियों को चिंता में डाल दिया। यह पहली बार है जब आतंककारी चलते-फिरते बंकर में बैठकर हमला करने आए।
जानकारी के अनुसार इसी के चलते प्रधानमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की। मुठभेड़ के बाद इस बात के संकेत मिले कि आतंकवादी मुंबई हमले की बारहवीं बरसी यानी 26 नवम्बर के आस-पास बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।
यह जानकारी मिलने के बाद प्रधानमंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हौर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला तथा खुफिया एजेन्सियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
खुफिया एजेन्सियों को पता चला है कि मारे गये आतंकवादी जैश ए मोहम्मद के थे और वे मुंबई हमलों की 12वीं बरसी से पहले किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश के तहत यहां आये थे। मारे गये आतंकवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है। सुरक्षा बलों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पहली बार इतने हथियार बरामद हुए हैं।

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