जयपुर. राजस्थान ने कहा है कि केन्द्र ने राज्यों की केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी 32 से बढ़ाकर भले ही 42 प्रतिशत कर दिया हो लेकिन उससे राज्यों की वित्तीय स्थिति सुधरने की अपेक्षा बिगड़ती जा रही है क्योंकि केन्द्र ने बढ़ाए हुए दस प्रतिशत हिस्से में उन अनुदानों को भी शामिल कर लिया जो पहले राज्यों को मिला करते थे। इतना ही नहीं उसने केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं में भी वित्तीय अनुपात को 75 से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया। इन हालात में राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय भार में भारी बढ़ोतरी हो गई है।

राज्य ने यह राय विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक में जाहिर की। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने किया। बैठक में धारीवाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 03 प्रतिशत ऋण सीमा आवश्यक वित्तीय संसाधनों की दृष्टि से राजस्थान के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि जीएसडीपी की 02 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण सीमा स्वीकृ​त की जानी चाहिए ताकि और अधिक ऋण लिया जा सके। कोरोना महामारी और आर्थिक मंदी के कारण जीएसटी संग्रहण कम होने से होने वाले राजस्व घाटे की क्षतिपूर्ति का दायरा जून 2027 तक बढ़ाया जाए।

धारीवाल ने मुख्य खनिजों की रॉयल्टी दरों में बढ़ोतरी के साथ ही देश में बनने वाले सोने व चांदी के गहनों, मूल्यवान व अर्द्धमूल्यवान गहनों पर आयात शुल्क 7.50 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत किये जाने का सुझाव दिया। धारीवाल ने केन्द्र के तीन कृषि कानूनों का पुनः निरीक्षण करने पर जोर दिया।

धारीवाल ने इस बात पर क्षोभ जताया कि राजस्थान की किसी भी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की कि राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा देकर बजट में शामिल किया जाए। धारीवाल ने नई रेल लिंक परियोजनाओं रतलाम-डूंगरपुर, गंगापुरसिटी के साथ धौलपुर और सरमथुरा के बीच ब्रॉडगेज, अजमेर से सवाईमाधोपुर वाया टोंक एवं जैसलमेर से कांडला पोर्ट को केन्द्रीय बजट 2021-22 में शामिल किए जाने का आग्रह किया।

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