किसान नेताओं का आरोप

नई दिल्ली. किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे पंजाब और हरियाणा के आढ़तियों और सेलेब्रिटी के खिलाफ ईडी और आयकर विभाग की कार्रवाई को आंदोलन की रीढ़ तोड़ने के लिए सरकार का अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन किसान नेताओं का सवाल है कि छापे और कार्रवाई इसी समय क्यों? क्या ईडी और आयकर विभाग को आंदोलन शुरू होने के बाद ही आढ़तियों के कर चोरी में लिप्त रहने की सूचना मिली!

अर्थशोधन निवारण अधिनियम और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा) की प्रवर्तन एजेंसी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंध के संभावित उल्लंघन मामले में भारतीय किसान यूनियन (उग्राहन) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां के निजी बैंक खाते में प्राप्त हुए दान के पैसों की जानकारी मांगी।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ईडी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि कुछ गायक और अदाकार, किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे एनआरआई उनकी निगाह में हैं। कई महीनों से किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे लोकप्रिय पंजाबी गायक रंजीत बावा भी ईडी के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ जालंधर के बीजेपी नेता अशोक सरीन हिक्की ने शिकायत दर्ज कराई कि बावा के संदिग्ध नार्कोटिक्स डीलर गुरदीप सिंह रानो के साथ रिश्ते थे।

किसान आंदोलन पर केन्द्रित बावा की पहली एल्बम कड़वा सच रिलीज़ हो चुकी है। आठ दिसम्बर को उनका गीत पंजाब बोलदा रिलीज़ होते ही हिट हो गया। यूट्यूब पर उसके 1.3 करोड़ व्यूज़ आ चुके हैं। बावा का आंदोलन पर एक और गीत फातेह आ का पोस्टर भी रिलीज हो चुका है।

पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रुलदू सिंह मानसा ने पांच दिन पहले सिंघू बॉर्डर पर एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि आढ़तिए पैसे और अनाज से किसानों की मदद कर रहे हैं। उनके यहां छापेमारी निंदनीय है। पंजाब आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कालरा को 14 दिसंबर को आयकर विभाग के नोटिस मिले लेकिन एक हफ्ते में जवाब देने की समयावधि पूरी होने से पहले ही उनके ठिकानों पर 50-60 सीआरपीएफ जवानों के साथ आयकर विभाग ने छापे डाले। इसके अलावा पटियाला और एसबीएस नगर के पांच अन्य आढ़तियों पर भी छापे पड़ चुके हैं।

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