नई दिल्ली. अगर बांदा जिले के कई पंचायत प्र​मुखों की ओर से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्रों को प्रमाण माना जाए तो उत्तरप्रदेश में आवारा पशुओं विशेषकर गोवंश की हालत बेहद खराब है और वे भूख से दम तोड़ रहे हैं। योगी सरकार जनवरी 2019 से आवारा गायों की देखभाल के लिए अस्थायी गोशालाएं चलाती हैं जिनके चारे—पानी के लिए सरकारी फंड आवंटित किया जाता है।

हालात ये हो गए हैं कि अस्थायी गोशाला चलाने वाली पंचायतों के प्रमुख ये धमकी दे रहे हैं कि फंड नहीं मिला तो उन्हें आवारा गायों को गोशालाओं से बाहर करना पड़ेगा। एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार बांदा जिले के एक दर्जन से अधिक पंचायत प्रमुखों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि वे 2018 से 43 गोशालाएं चला रहे हैं। लेकिन अप्रैल 2020 से फंड नहीं मिला।

अगर 25 दिसम्बर तक फंड नहीं मिला तो इन पशुओं को छोड़ना पड़ेगा। 43 गोशालाओं में 15,000 आवारा पशु हैं। पिछले वित्त वर्ष में योगी सरकार ने 613 करोड़ रुपये का आवंटन किया था, लेकिन चालू वित्त वर्ष के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है। एक गाय की देखभाल के लिए एक दिन में 30 रुपये दिए जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी उत्तर प्रदेश में गोवंश की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि वे गोवंश की इस दुर्दशा को खत्म करने के लिए छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई गोधन न्याय योजना से प्रेरणा लें। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में खोली गई गोशालाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं और गोरक्षा में प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी तरह विफल रही है।

Leave a comment

Your email address will not be published.