नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान फिर नई मुसीबत में फंस गए हैं। इस बार मुसीबत का नाम उमा भारती है। वही उमा भारती जो मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और पिछली मोदी सरकार में भी मंत्री थीं। उन्होंने शिवराज सरकार की शराब बिक्री बढ़ाने की योजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

एमपी के मुरैना में हाल ही जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत होने के बाद सरकार ने अवैध शराब कारोबार पर लगाम लगाने के लिए शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने पर विचार शुरू किया है। लेकिन इस बीच उमा भारती ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से बीजेपी शासित राज्यों में बिहार का शराबंदी मॉडल लागू करने की मांग कर डाली।

उमा भारती ने कहा है कि हाल में यूपी और मध्यप्रदेश में शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। सड़क दुर्घटनाओं के अधिकतर कारण ड्राइवर का शराब पीना ही होता है। शराब मृत्यु का दूत है, फिर भी थोड़े राजस्व का लालच और शराब माफिया का दबाव शराबबंदी नहीं होने देता है।

भारती ने कहा कि अगर देखा जाए तो सरकारी व्यवस्था उसी तरह लोगों को शराब पिलाने का प्रबंध करती है, जैसे मां बालक के पोषण की अपेक्षा उसे जहर पिलाना शुरू कर दे।
उमा भारती ने कहा कि वे अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से इस ट्वीट के माध्यम से सार्वजनिक अपील करती हैं कि जहां भी बीजेपी की सरकार हैं, उन राज्यों में पूर्ण शराबबंदी की तैयारी करिए।

उन्होंने कहा कि यह सही है कि राजनीतिक दलों पर चुनाव जीतने का दबाव रहता है। बिहार में बीजेपी की जीत यह साबित करती है कि शराबबंदी के कारण महिलाओं ने एकतरफा वोट नीतीश कुमार जी को दिए। शराबबंदी कहीं से भी घाटे का सौदा नहीं। शराबबंदी से राजस्व को हुई क्षति को कहीं से भी पूरा किया जा सकता है।

लेकिन शराब के नशे में बलात्कार, हत्याएं, दुर्घटनाएं छोटी बालिकाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं भयावह है और देश व समाज के लिए कलंक है। उधर मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए मैंने दुकानों की संख्या बढ़ाने की तर्क सम्मत बात सबके सामने रखी है। इस पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सीएम को है। गौरतलब है कि कांग्रेस पहले से ही सरकार के विचार पर सवाल उठा रही है। इस बीच उमा भारती भी इस सुझाव के विरोध में उतर आई हैं। ऐसे में शिवराज सरकार के लिए इस सुझाव को लागू करना आसान नहीं होगा।

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