दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला

नई दिल्ली. फ्यूचर ग्रुप पर कब्जे के लिए एमेजॉन के साथ चल रही अहम लड़ाई में रिलायंस का पलड़ा भारी हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड बोर्ड की मंजूरी को वैध करार दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नियामकों को निर्देश दिया है कि वे फ्यूचर ग्रुप के आवेदन और आपत्तियों पर कानून के अनुसार निर्णय करें। इसके साथ ही सौदे पर नियामकों से फ्यूचर ग्रुप की आपत्तियों और आवेदन के अनुसार निर्णय का निर्देश भी दिया।

इससे पहले सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि रिलायंस को सौदे की मंजूरी देने वाला फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) बोर्ड प्रस्ताव मान्य है और पहली नजर में वैधानिक प्रावधानों के अनुसार नजर आता है। एमेजॉन ने इसे अमान्य करार दिया था।

न्यायालय ने 132 पन्नों के आदेश में कहा कि एमेजॉन ने फेमा और एफडीआई के नियमों का उल्लधंन किया है। एमेजॉन ने एफआरएल पर नियंत्रण की कोशिश की जिसे सही नही ठहराया जा सकता। इसी के साथ यह मामला भारतीय प्रतिभूति नियामक आयोग (सेबी) नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) और अन्य नियामकों के पाले में आ गया है।

इससे पूर्व 20 नवंबर को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर समूह के सौदे को मंजूरी दे दी थी। जिसके बाद दोनों कंपनियां सौदे को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं। सीसीआई के फैसले से भी अमेरिकी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन को तगड़ा झटका लगा था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडायरी कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने इस साल अगस्त में फ्यूचर ग्रुप के रिटेल एंड होलसेल बिजनेस और लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग बिजनेस के अधिग्रहण का एलान किया था। इस डील के बाद फ्यूचर ग्रुप के 420 शहरों में फैले हुए 1,800 से अधिक स्टोर्स तक रिलायंस की पहुंच बन जाती। यह डील 24713 करोड़ में फाइनल हुई थी।

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