केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) का नया आदेश

नई दिल्ली. अब औद्योगिक इकाइयों, खनन परियोजनाओं को खारा पानी निकालने पर अब भू-जल दोहन या पुनरुद्धार का शुल्क नहीं देना होगा क्योंकि केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने इसे माफ कर दिया है।

केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण बोर्ड ने कहा है कि भू-जल निकासी के तहत खारे पानी को जमीन के भीतर से निकालने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सीजीडब्ल्यूए के मुताबिक देश में कुल 6607 स्थानों में से 1071 अति-दोहित, 217 गंभीर और 697 अर्ध-गंभीर व 4580 सुरक्षित स्थान हैं। लगभग 92 ऐसे स्थानों की पहचान भी की गई है, जहां सेलाइन अर्थात पानी खारा है। ऐसा पानी जिसमें 25 डिग्री सेल्सियस पर विद्युत चालकता (ईसी) 5000 माइक्रोसाइमंस हो वह खारा पानी कहलाता है।

भू-गर्भ से खारे पानी की निकासी को लेकर जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि सभी इकाइयों को उचित प्रवाह (इफ्लुएंट ) निपटान योजना तैयार करना होगा ताकि पर्यावरण और आस-पास के क्षेत्रों को नुकसान न हो। वहीं, भू-जल के अति-दोहित (ओवर एक्सपलॉएटेड) स्थानों पर नई प्रमुख इकाइयों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दिया जाएगा।

खारे पानी वाले स्थानों के लिए तय की गई शर्तों में कहा गया है कि जहां 500 (केएलडी) किलोलीटर प्रतिदिन से अधिक खारे पानी की भू-जल निकासी होती है वहां प्रभाव आकलन रिपोर्ट भी देनी होगी। तेल और खनन कंपनियों को खारे पानी की निकासी या डीवाटरिंग करने के लिए सरकारी एजेंसियों और प्राधिकरणों से मंजूर प्लान दिखाना होगा।

ऐसे स्थान जहां आंशिक तौर पर खारा पानी है वहां 100 केएलडी से ज्यादा खारा पानी की निकासी करने वालों को प्रभाव आकलन रिपोर्ट देनी होगी। पानी निकासी की निगरानी के लिए पीजोमीटर भी लगाना होगा। यदि खारे पानी की जगह ताजा पानी बाहर आता है तो सीजीडब्ल्यूबी क्षेत्रीय कार्यालय को सूचित करना होगा। खारे पानी की निकासी करने वालों को उपभवन नियम के मुताबिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाना होगा।

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