दिल्ली की सीमाओं पर डटे आंदोलनकारी किसानों की नई मांग

नई दिल्ली. कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर 31 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान चाहते हैं कि केन्द्र सरकार कृषि कानूनों को निरस्त करने के साथ ही पराली मामले में किसानों को दंडित करने के प्रावधानों और विद्युत संशोधन विधेयक में भी संशोधन चाहते हैं।

केन्द्र सरकार की पहल पर वार्ता के लिए तैयार हुए किसानों ने बैठक का एजेंडा तय करते हुए सरकार को पत्र लिखा है कि 29 दिसम्बर को होने वाली वार्ता में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में संशोधन करके दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने पर भी विचार किया जाए। इसके अतिरिक्त किसानों के हितों की रक्षा के लिए ’विद्युत संशोधन विधेयक 2020’ के मसौदे में भी जरूरी बदलाव भी करे।

किसान नेताओं की बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने बताया कि किसान नेताओं ने सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया है। सरकार से बातचीत के लिए 29 दिसंबर को सुबह 11 बजे बैठक का प्रस्ताव भेजा गया है। इस बीच आंदोलनकारी किसानों का साथ देने के लिए पंजाब से किसानों के कई जत्थे राशन और अन्य आवश्यक सामान के साथ दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़ रहे हैं। किसान यूनियन के अनुसार संगरूर, अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और बठिंडा समेत विभिन्न स्थानों से किसान सिंघू और टिकरी बॉर्डरों की ओर आ रहे हैं।

पंजाब के कई हिस्सों में कोहरे और शीत लहर के बावजूद ट्रैक्टर ट्रॉली, कारों और अन्य वाहनों से दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़ रहे है। ये वाहन अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे हैं। किसानों ट्रॉलियों में राशन और अन्य आवश्यक सामान भी लदा हुआ है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) ने दावा किया कि खनौरी और डबवाली सीमा से हजारों किसानों के नये जत्थे आ रहे हैं। जत्थों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं।

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