नई दिल्ली. लालकिला कांड के बाद राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने स्वयं को farmers protest: किसान आंदोलन से अलग कर लिया है। संगठन अध्यक्ष वीएम सिंह की अगुवाई में ये संगठन गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहा था। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन-भानू ने भी किसान आंदोलन से होने की घोषणा की है। इस बीच इस मांग में तेजी आ गई है कि मंगलवार को दिल्ली में उपद्रव करने में शामिल लोगों को तुरंत सलाखों के पीछे पहुंचाया जाए। इसी को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में शामिल लोगों की जल्द से जल्द पहचान करने का आदेश पुलिस को दिया है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से कहा कि हिंसा एवं देशविरोधी गतिविधियों में शामिल एक भी व्यक्ति गिरफ्त से बचना नहीं चाहिए। दिल्ली पुलिस अब तक 25 एफआईआर दर्ज कर चुकी है जिनमें 50 किसान नेताओं को नामजद किया गया है। करीब 70 उपद्रवियों में से 20 को गिरफ्तार कर लिया गया है और करीब 50 उपद्रवी हिरासत में हैं।

उपद्रव के लिए कहां से आए फंड !

पुलिस सूत्रों के अनुसार दिल्ली पुलिस का पूरा फोकस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज खंगालकर साक्ष्य जुटाने और उन लोगों की पहचान करने पर है जिन्होंने हिंसा के लिए लोगों को उकसाया। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इतने बड़े बवाल के लिए फंड और संसाधन कहां आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय भी दिल्ली पुलिस की एफआईआर के आधार पर किसान नेताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकता है। उल्लेखनीय है कि एनआईए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की ओर से हुई फंडिंग के मामले में पहले से ही जांच कर रही है।

भड़काने वालों में दर्शनपाल का भी नाम

उधर, किसान नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि ट्रैक्टर परेड के दौरान बाहरी तत्वों ने उपद्रव किया और इसकी जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाए। दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों का शुरूआती इनपुट के आधार पर मानना है कि प्रमुख किसान नेता दर्शन पाल ने उपद्रवियों को सिंघु, टिकरी और गाजीपुर की सीमाओं पर भड़काया। लालकिले पर उपद्रव के पीछे पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू की प्रमुख भूमिका रहने का अंदेशा है। उसी ने लाल किले की प्राचीर पर सिखों का धार्मिक झंडा ’निशान साहिब’ फहराने का आइडिया दिया।

मुकदमों में गवाह बनाया जाएगा दीप सिद्धू

एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार एनआईए जल्द ही दीप सिद्धू को समन देगी और उसे सिख फॉर जस्टिस और बब्बर खालसा जैसे खालिस्तान समर्थक संगठनों के खिलाफ मुकदमों में गवाह बनाएगी। सिद्धू ने पहले नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया था। 15 दिसंबर 2020 को दर्ज एनआईए की एफआईआर के मुताबिक एसएफजे एवं अन्य प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठनों ने नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के बीच डर का माहौल बनाने, साजिश रचने और उन्हें उपद्रवी गतिविधियों में धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

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