नई दिल्ली. केन्द्र सरकार से आठवें दौर की वार्ता करने पहुंचे आंदोलनकारी किसानों ने सोमवार को भी सरकार का भोजन ग्रहण नहीं किया। किसानों के प्रतिनिधियों ने अपने लंगर से मंगाकर ही लंच किया।

सरकार की ओर से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश की मौजूदगी में हुई वार्ता शुरू होने से पहले 2 मिनट का मौन रखकर आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी गई।

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन सोमवार को 40वें दिन में प्रवेश कर गया। दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों की सरकार के साथ जारी बातचीत के दौरान सरकार ने भोजन की व्यवस्था की थी, लेकिन किसानों ने सरकार का खाना खाने से इनकार कर दिया। किसानों ने अपने लंगर का लाया गया भोजन ही किया।

बैठक के दौरान करीब 200 लोगों का खाना लंगर से विज्ञान भवन पहुंचाया गया। पिछली मीटिंग में भी किसानों ने लंगर का खाना ही खाया था। उस समय केंद्रीय मंत्रियों ने भी किसानों के साथ भोजन किया था।

समाचार एजेंसियों के अनुसार बातचीत के दौरान किसानों को समझाने के लिए सरकार कानूनों के हर क्लॉज पर चर्चा कर रही है। वार्ता शुरू होने से पहले पहले कृषि मंत्री ने कहा कि उन्हें सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है। जबकि किसान संगठनों कहना है कि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो प्रदर्शन तेज किया जाएगा।

ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोला ने कहा, कि ये सरकार पर है कि वह किसानों की समस्याओं का हल निकालना चाहती है या फिर उनके खिलाफ साजिश कर उनके संघर्ष को कमजोर करना चाहती है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अब तक 60 किसानों की जान जा चुकी है। हर 16 घंटे में एक किसान मर रहा है। सरकार की जवाबदेही बनती है लेकिन अभी तक सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।

यहां यह उल्लेखनीय है कि सरकार और किसानों के बीच अब तक सात दौर की बात हो चुकी है लेकिन उनमें से सिर्फ तीस दिसम्बर को हुई वार्ता में ही दो मुद्दों पर सहमति बन सकी।

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