कृषि कानून वापसी पर अड़े रहे किसान

नई दिल्ली. चालीस दिन से दिल्ली के बार्डर पर बैठे आंदोलनकारी किसानों से आठवें दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे पर पहुंचे समाप्त हो गई। बातचीत के दौरान सरकार के मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच जमकर बहस हुई।

मंत्री कृषि कानूनों के प्रत्येक क्लाज पर बात करना चाहते थे लेकिन किसान तीनों कानूनों को वापस लेने पर अड़ गए। कृषि क़ानूनों पर पिछले चालीस दिन से केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच गतिरोध बना हुआ है।

करने होंगे कृषि कानून रद्द

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलमंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश के साथ आठवें दौर की बातचीत में 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई बातचीत के दौरान मंत्री बिल के हर क्लॉज़ पर बात करना चाहते थे लेकिन किसानों ने कहा कि सरकार को पूरा बिल रद्द करना होगा। किसान नेताओं और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुई।

इससे पहले 30 दिसंबर को सातवें दौर की बातचीत में बिजली सब्सिडी को जारी रखने और पराली जलाने को आपराधिक गतिविधि न माने जाने पर सहमति बन गई थी। सोमवार को आठवें चक्र की वार्ता से एक दिन पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करके मौजूदा जारी संकट को सुलझाने की रणनीति पर चर्चा की।

सितंबर 2020 से लागू कृषि क़ानूनों को केंद्र सरकार कृषि सुधार और किसानों की आमदनी बढ़ाने का क़दम बता रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि इससे समर्थन मूल्य और मंडी की व्यवस्था कमज़ोर होगी और वे बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों की दया पर निर्भर रह जाएंगे।

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