जयपुर. कहते हैं कि रिश्वत खाने की आदत रिटायर होने के बाद भी नहीं छूटती। ऐसे ही एक आदतन रिटायर रिश्वतखोर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। अधिकारी के ठिकानों की तलाशी में लाखों की नकदी सहित अन्य संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। अधिकाररी के साथ एक दलाल नजीर खान को भी गिरफ्तार किया गया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार ब्यूरो की टीम ने वरिष्ठ आरएएस अधिकारी प्रेमाराम परमार को उसके बाड़मेर स्थित आवास पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। परमार बीती 31 अक्टूबर को बीकानेर में उपनिवेशन विभाग में अतिरिक्त आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए थे। ब्यूरो को शिकायत मिली थी कि परमार सेवानिवृत्ति से ठीक पहले पौंग बांध विस्थापितों, भूतपूर्व सैनिकों, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के विस्थापितों व भूमिहीन किसानों के नाम पर दलालों के मार्फत भूमि आवंटन कर भारी रिश्वत राशि ले रहा है।

ब्यूरो एक महीने से उस पर निगरानी रख रहा था। ब्यूरो टीम ने बाड़मेर स्थित निवास पर प्रेमाराम को दलाल नजीर खां से पांच लाख रूपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। तलाशी में प्रेमाराम के पास अकूत संपत्ति होने के प्रमाण मिले हैं तथा करीब 20 लाख रूपये नकद मिले हैं। प्रेमाराम के जयपुर स्थित आवास से आठ लाख रूपये नकद व सम्पति के दस्तावेज, जोधपुर आवास से 7.72 लाख रूपये नकद व 15 लाख के स्वर्ण आभूषण व जमीन जायदाद के दस्तावेज, बाड़मेर आवास से करीब तीन लाख रूपये व 20 लाख रुपये के स्वर्ण आभूषण इत्यादि मिले है।

आरोपी के जोधपुर आवास पर बड़ी तादाद में विदेशी और महंगी शराब की बोतलें भी मिली हैं जिस पर आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। दलाल नजीर खां विस्थापितों को बहुत ही कम पैसे देकर उनके नाम पर उपनिवेशन विभाग की मिलीभगत से अच्छी जमीन आवंटित करवाकर अपने नाम अथवा अन्य के नाम रजिस्ट्री करवाकर महंगे भाव में बेचता था। जो विस्थापित इनके माध्यम से जमीन आवंटित नहीं करवाता था उसे बेकार की बंजर जमीन देरी से आवंटित की जाती।

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