चार जाबांज हो गए थे शहीद

नई दिल्ली. कश्मीर में बढ़ती आतंकी घटनाओं से ​सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ती जा रही है। जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के 15 महीनों बाद भी आतंकवादियों से सुरक्षा बलों की मुठभेड आए दिन होती है। हाल ही एक मुठभेड़ में चार भारतीय सैनिक शहीद हो गए और दो घायल हो गए। मुठभेड में तीन आतंकी भी मारे गए।
बीते आठ नवम्बर को नियंत्रण रेखा के पास कुपवाड़ा जिले के माछील सेक्टर में हुई मुठभेड में कई महीनों में इलाके में सुरक्षाबलों को होने वाला सबसे बड़ा नुकसान है।

शुरूआती गोलाबारी में एक सैनिक और एक संदिग्ध आतंकवादी मारा गया और उसके बाद वहां और भी सुरक्षाकर्मी भेजे गए। बाद में दो और सैनिक और दो संदिग्ध आतंकी भी मारे गए। इसके पहले इसी साल अप्रैल में दो अलग अलग घटनाओं में नौ संदिग्ध आतंकी और तीन सैनिक मारे गए थे।

भारत के लिए सिरदर्द बना हुआ है ये राज्य

नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार गोलीबारी होती रहती है लेकिन ये घटनाएं अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटा दिए जाने के बाद से बढ़ गई हैं। असल में
मुस्लिम-बहुल कश्मीर स्वतंत्रता के बाद से ही भारत के लिए सिरदर्द रहा है। इस बीच कश्मीरियों ने केंद्र सरकार पर इलाके की स्थानीय आबादी के साथ नाइंसाफी करने का आरोप लगाया है। उधर पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान को राज्य का दर्जे देने की घोषणा करके भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया। गिलगित-बाल्तिस्तान अखंड कश्मीर का हिस्सा है और वह पाक के जबरन कब्जाए गए इलाके में शामिल है।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है गिलगित-बाल्तिस्तान

ये इलाका जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उत्तर-पश्चिम में पड़ता है। पाक अधिकृत कश्मीर, पाकिस्तान का खैबर-पख्तुनख्वा प्रांत, अफगानिस्तान का वखान गलियारा और चीन का शिंकियांग इलाका भी इससे सटा हुआ है और उसकी यही स्थिति उसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बना देती है।

Leave a comment

Your email address will not be published.