नई दिल्ली. बाजार में देसी फसल आने से पहले प्याज के दामों में गिरावट की उम्मीद बेमानी है क्योंकि प्याज पर स्टॉक लिमिट तय करने और आयातित प्याज बाजार में उतारे जाने के बावजूद उसके दाम गरीबों की पहुंच में नहीं आ पाए हैं।

आयातित लाल प्याज देश के बाजारों में 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। आयातित प्याज का लागत मूल्य मुंबई पोर्ट पर करीब 40 से 45 रुपये प्रति किलो पड़ता है। ऐसे में देश के विभिन्न राज्यों में आयातित प्याज के परिवहन की लागत जोड़ने के बाद 55 से 65 रुपये प्रति किलो से कम भाव पर आयातित प्याज उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है।

मंगाया है अफगानी प्याज

जानकारी के अनुसार, भारत इस समय ईरान, मिस्र, तुर्की और हॉलैंड के साथ-साथ अफगानिस्तान से प्याज आयात कर रहा है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध खुदरा कीमत सूची के अनुसार, देशभर में प्याज की औसत खुदरा कीमत रविवार को 65 रुपये प्रति किलो थी। दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में भी रविवार को प्याज का खुदरा भाव 60 से 70 रुपये प्रति किलो था।

नए टेंडर मांगे

इस बीच देश में कृषि उत्पादों के विपणन की शीर्ष सहकारी संस्था नेशनल एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से शनिवार को जारी टेंडर में आयातकों से 40 से 60 मिलीमीटर आकार के 15,000 टन लाल प्याज की आपूर्ति के लिए बोलियां मंगाई गई हैं। टेंडर में कहा गया है कि चिन्हित भारतीय पोर्ट पर ट्रक लोड/रैक लोड पर प्याज आपूर्ति किए जाने वाले प्याज की बोली का मूल्य 50,000 रुपये प्रति टन यानी 50 रुपये प्रति किलो होगा।

इधर राजस्थान से प्याज की नई फसल की आवक होने लगी है। केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को थोक एवं खुदरा व्यापारियों के लिए प्याज का स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी। जिसके अनुसार खुदरा कारोबारी अधिकतम दो टन और थोक व्यापारी अधिकतम 25 टन प्याज का स्टॉक कर सकता है। सरकार ने 31 दिसंबर, 2020 तक की अवधि के लिए प्याज पर स्टॉक लिमिट लगाई है। इससे पहले 14 सितंबर को ही सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी थी। वहीं, नैफेड के पास पड़े बफर स्टॉक से 36,000 टन प्याज देश के बाजारों में उतारी गई है।

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