नई दिल्ली. स्वतंत्रता के बाद से ओलम्पिक में स्वर्ण पदकों के लिए तरसते रहे भारत ने अब खेलों के कंधे से सरकारी जुए (खेत जोतने वाले हल से सम्बंधित) को उतार फेंकने का फैसला किया है। उसने खेलो इंडिया योजना के जरिए देश भर की उन 500 निजी खेल अकादमी को आर्थिक सहायता देने की योजना बनाई है जो सरकारी अकादमियों के मुकाबले ज्यादा अच्छे खिलाड़ी तैयारी कर रही हैं। खेल मंत्रालय ने अगले चार वर्षों में ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत 500 निजी अकादमियों को आर्थिक सहायता देने के लिये नये प्रोत्साहन ढांचे का एलान किया है।

पहले चरण में 14 खेलों का चयन

योजना के तहत निजी अकादमियों को उनके प्रशिक्षित खिलाड़ियों की गुणवत्ता और उपलब्धि, अकादमी में उपलब्ध कोचों के स्तर, संबद्धित बुनियादी ढांचे, खेल विज्ञान सुविधाओं और कर्मचारियों की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाएगा। 2028 ओलंपिक के मद्देनजर प्राथमिकता के तौर पर चुने गए 14 खेलों को पहले चरण में शामिल किया गया है।

बुनियादी ढांचे में किया जाएगा बदलाव

खेल मंत्री किरेन रीजीजू के अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों में बहुत सारी छोटी अकादमियां हैं जो एथलीटों की पहचान और प्रशिक्षण की दिशा में अच्छा काम कर रही हैं। सभी अकादमियों, विशेषकर निजी अकादमियों को प्रोत्साहित करके उनके बुनियादी ढांचे व संसाधनों के स्तर में सुधार जारी रखने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है। ओलंपिक पदक विजेता और भारतीय निशानेबाज गगन नारंग ने कहा कि इससे निजी अकादमियों का मनोबल बढाने की दिशा में मदद मिलेगी। इससे अकादमियां विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह खेल को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

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