अमित शाह से मुलाकात के बाद बदले टीआरएस के सुर

नई दिल्ली. हैदराबाद नगर निगम चुनाव में टीआरएस को कोसने वाली भाजपा ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर तेलंगाना राष्ट्र समिति को यूटर्न लेने के लिए मना लिया है। इसी के चलते टीआरएस सरकार ने कहा है कि वह किसानों से अनाज नहीं खरीदेगी। जबकि उसने कृषि कानूनों के खिलाफ वोट देने के साथ ही भारत बंद का भी समर्थन किया था।

राजनीतिक जानकार टीआरएस के इस पैंतरे से हैरान हैं क्योंकि कुछ दिनों पूर्व ही यह अनुमान लगाया जा रहा था कि हैदराबाद नगर निगम चुनावों में भाजपा से हुए टकराव के बाद टीआरएस को अपने अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के दर्शन हो गए थे और वे अपने राज्य में भाजपा के विस्तार से चिंतित हैं और उसका वास्तविक राजनीतिक विरोध करने को तैयार हैं।

टीआरएस सरकार ने कहा है कि अनाज खरीदना सरकार का काम नहीं है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा कि किसानों को कहीं भी उपज बेचने की अनुमति देने के लिए राज्य सरकार को अनाज खरीद की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि नए कृषि कानून देशभर में लागू किया जा रहे हैं। पार्टी का यह रुख पिछले दिनों दिल्ली में केसीआर के पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद देखने को मिला है। जबकि टीआरएस ने इससे पहले संसद में इस कानून के खिलाफ वोट किया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा है कि सरकार व्यापारिक संगठन या व्यापारी नहीं है। सरकार राइस मिलर या दाल मिलर नहीं है। बिक्री और खरीद सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने अगले साल से गांव में खरीद केंद्र स्थापित करने से भी मना कर दिया है। पिछले सीजन में सरकार ने गांवों में खरीद केंद्र स्थापित किए थे। उसे धान, सरसों, मक्का, लाल चना, बेंगल चना और सूरजमुखी की खरीद से 7500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सरकार ने इन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भुगतान किया था, लेकिन बाद में उसे कम कीमतों पर बेचना पड़ा क्योंकि उनकी डिमांड नहीं थी।

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