नई दिल्ली. महिलाओं को घरों में कैद करने के बाद कोरोना लॉकडाउन ने उनकी गरिमा को तो बेइज्जत किया ही, उन्हें घरों में घरेलू हिंसा का सामना भी करना पड़ा। राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़े कहते हैं कि महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के मामले में उत्तर प्रदेश अव्वल रहा।

एनसीडब्ल्यू के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक 11,872 शिकायतें उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने की। इसके अलावा दिल्ली की 2,635, हरियाणा 1,266 और महाराष्ट्र की 1,188 महिलाएं अपनी शिकायत लेकर महिला आयोग पहुंची।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) को महिलाओं के खिलाफ हिंसा की 23,722 शिकायतें मिलीं। शिकायतों का ये आंकडा छह साल में सबसे ज्यादा है। कुल शिकायतों में से एक चौथाई घरेलू हिंसा की थीं। दूसरे शब्दों में कहें तो कोरोना लॉकडाउन ने घर को महिलाओं के असुरक्षित स्थान बना दिया। पिछले साल मिली कुल 5,294 शिकायतें घरेलू हिंसा से जुड़ीं थी। अनुमान है कि ये शिकायतें नगण्य हैं क्योंकि कई महिलाएं तो भय के कारण शिकायत भी नहीं कर पाती हैं।

असल में आर्थिक असुरक्षा, तनाव के स्तर में वृद्धि, चिंता, वित्तीय चिंताएं और माता-पिता से भावनात्मक समर्थन नहीं मिलने के कारण 2020 में घरेलू हिंसा के मामले बढ़े। इसका कारण दंपति के लिए घर का दफ्तर बन जाना रहा। उनके बच्चों के लिए स्कूल और कॉलेज भी घर ही बन गया। इस दौरान महिलाओं को कई काम एक साथ करने पड़े। इसलिए पिछले छह सालों में सबसे ज्यादा शिकायतें साल 2020 में दर्ज की गईं। इससे पहले साल 2014 में 33,906 शिकायतें दर्ज की गईं थीं।

देश में लॉकडाउन लगते ही महिला आयोग के पास घरेलू हिंसा की शिकायतों की भरमार लग गई। महिलाओं के पास इस दौरान बाहर जाने का विकल्प नहीं था और उन्हें घर पर ही हिंसा का सामना करना पड़ा। घरेलू हिंसा की शिकायतें जुलाई में तेजी से बढ़ी।

संयुक्त राष्ट्र के अभियान से हाल ही में जुड़ी मॉडल और अभिनेत्री मानुषी छिल्लर के अनुसार महिलाएं हर कहीं अलग-अलग तरह से हिंसा की शिकार होती हैं। महिलाओं को हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और दूसरी महिलाओं को भी ऐसा करने के लिए सशक्त बनाने की जरूरत है।

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