शहद में मिलावट के धंधे के भंडाफोड का नतीजा

नई दिल्ली. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की ये आशंका सही निकली कि शहद में मिलावट करने वाली कम्पनियां भंडाफोड होते ही ओछे हथकंडों पर उतर आएंगी। जहां मिलावट की आरोपी डाबर ने जर्मनी की जांच में अपने शहद सेम्पल के पास होने का दावा किया है तो बाबा रामदेव की पंतजलि उसी हथकंडे पर कायम है जिसके तहत उसने विदेशी तकनीक वाली जांच का प्रचार करने का आरोप सीएसई पर लगाया है।

सीएसई ने 2 दिसंबर को खुलासा किया था कि देश के 13 में से 10 प्रमुख ब्रांड के शहद में मिलावट की जा रही है। जवाब में डाबर ने बयान दिया है कि इस रिपोर्ट से ब्रांड की छवि खराब हो रही है। उनका शहद जर्मनी से एनएमआर टेस्ट में सफल रहा है और भारतीय मानकों पर खरा उतरता है। जबकि सीएसई का कहना है कि वह अपनी रिपोर्ट पर कायम हैं। परिणामों में सामने आया है कि 13 में से 10 ब्रांड शुद्धता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें अधिकतर बड़े ब्रांड्स हैं, जिनमें डाबर भी शामिल है। ये उपभोक्ता की सेहत का सवाल है।

सीएसई का दावा है कि डाबर ने बयान के साथ मीडिया के सामने जिस एनएमआर टेस्ट रिपोर्ट को जारी किया है, वह एनएमआर प्रोफाइलिंग के लिए ब्रूकर इक्विपमेंट/मशीन की रिपोर्ट है। ब्रूकर एक कंपनी है जिसने एनएमआर तैयार किया है और जो उसे प्रमोट करती है। डाबर ने सिर्फ एक सैंपल की रिपोर्ट साझा की है। जिसके बैच नंबर का कोई जिक्र नहीं है। इसलिए यह साफ नहीं होता है कि किस बैच की बात की जा रही है। जबकि डाबर के तीन सैंपल बैच नंबर – BM3463 उत्पादन तारीख 25 मई 2020, बैच नंबर BM3589 की उत्पादन तारीख 10 जुलाई 2020 और बैच नंबर BM3636 जिसकी उत्पादन तारीख 5 अगस्त है, उसमें मिलावट पाई गई।

सीएसई का कहना है कि डाबर लगातार एनएमआर टेस्ट के संबंध में अपने दावों की भाषा में बदलाव कर रहा है। पुराने विज्ञापनों में डाबर ने शहद को “एनएमआर प्रमाणित, शुद्ध शहद” बताया था, जबकि अब वह “सोर्स एनएमआर प्रमाणित” होने का दावा कर रहा है।

इधर पतंजलि ने चिरपरिचित अंदाज में सीएसई पर जर्मनी की टेक्नोलॉजी का प्रसार का आरोप लगाया है। उत्पादनों की शुद्धता पर जब भी सवाल उठते हैं तो पतंजलि के प्रमोटर और कथित योग गुरू बाबा रामदेव विदेशी तकनीक, विदेशी निवेश, देसी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर आरोपों से बच निकलते रहे हैं। सीएसई का कहना है कि एनएमआर यानी कि न्यूक्लियर मेग्नेटिक रेजोनेंस एक उन्नत तकनीक वाला टेस्ट है, जो सिरप में चीनी की मिलावट का पता लगा सकता है। सामान्य टेस्ट से इसका पता नहीं लगता है। यह टेस्ट दुनिया के कई हिस्सों में किया जाता है। भारत सरकार ने भी इसे निर्यात किए जाने वाले शहद की जांच के लिए अगस्त 2020 से अनिवार्य कर दिया है।

Leave a comment

Your email address will not be published.