तमिलनाडु स्थित दर्पण आश्रम में बहुराष्ट्रीय कंपनी एनटीटी डेटा के अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम वृक्षारोपण करने तथा स्कूली बच्चों को उनकी ज़रूरत की सामग्री बाँटने में आश्रम की गतिविधियों में बतौर शिक्षा दर्पण स्वयंसेवक शामिल होने के लिए आई. जहां सहज स्मृति योग प्रवर्तक एवं दर्पण आश्रम के संस्थापक गुरुजी नंदकिशोर तिवारी ने सहज सरल उदाहरणों के माध्यम से अधिकारियों को टीम स्पिरिट और नेतृत्व विकास के गुर सिखाए.

लोक और परलोक दोनों ही क्षेत्रों से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर देते हुए गुरुजी ने प्रश्नोत्तर सेशन में उन्हें लौकिक विवेक और पारलौकिक विवेक के बीच का अंतर समझाया और मानव चेतना में दोनों के यथोचित स्थान का महत्व भी बताया. आगंतुकों ने दर्पण आश्रम के कौशल दर्पण प्रारूप की प्रसंशा कर इसे पर्यावरण संरक्षण के लिए अनुकरणीय बताया. सबने देश में कौशल विकास के महत्व को रेखांकित किया तथा इस दिशा में निरंतर सहयोग पर सहमति बनी.

गुरूजी के अनुसार आध्यात्मिक व्यक्ति और आध्यात्मिक स्थान दोनों ही का उद्देश्य व्यक्ति की चेतना में ऐसा उच्च और सकारात्मक परिवर्तन लाने और उसे स्थाई बनाए रखने का होता है जिससे सभी आगंतुक जीवन में आवश्यक लौकिक और पारलौकिक विवेक को पा सकें और जिस हेतु के लिए कि यह जीवन है उसी के लिए इसका सदुपयोग कर सकें. वह उच्च और सकारात्मक चेतना कैसे व्यक्ति, संस्थान व देश तथा विश्व की दृष्टि और व्यवहार में गुणात्मक परिवर्तन ले आती है इस बात को एक उदाहरण से समझ सकते हैं.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक छोटी वीडियो क्लिप आजकल वायरल है, जिसमें वे इस प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं कि यूक्रेन-रुस युद्द में भारत के रवैये को देखने के बाद कोई भी देश भारत का भरोसा क्यों करेगा? ये प्रश्न यूरोप के किसी पत्रकार ने किया था. वे इसका जो आत्मविश्वास भरा उत्तर अपनी सहज भाव भंगिमा के साथ देते हैं वह कई दिनों से वायरल है. देशवासियों को लगा कि जयशंकर जिस लहजे में बात कर रहे हैं, वह बिलकुल उन सब के दिल की बात बोल रहे हैं. जब आप सबके दिल की बात बोल सकें तो यह आप में चेतना के उच्च होने का प्रमाण होता है.

जब आप सबको उनकी अपनी दृष्टि में जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार कर साथ लेकर चलते हैं तो नेतृत्व निखरता है आत्म विश्वास बढ़ता है और यह आपकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण होता है.

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