नई दिल्ली. उपराज्यपाल किरण बेदी को हटाने की मांग को लेकर पिछले तीन दिन से पुदुचेरी के मुख्यमंत्री धरने पर बैठे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि उपराज्यपाल किरण बेदी निर्वाचित सरकार की विकास योजनाओं तथा कल्याणकारी क़दमों को बाधित कर रही हैं। राज्य में क़रीब तीन महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

पुदुचेरी का दर्जा समाप्त करने के षडयंत्र का आरोप

धरने में मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी, पीसीसी अध्यक्ष एवी सुब्रमणियन, मंत्रियों, कांग्रेस विधायकों, कार्यकर्ताओं और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा वीसीके की विभिन्न इकाइयां हिस्सा ले रही हैं। धरने पर बैठे मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी का कहना है कि उपराज्यपाल चुनी हुई सरकार को काम करने की अनुमति नहीं दे रही हैं और हर दिन राज्य प्रशासन में हस्तक्षेप करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किरण बेदी ने पुदुचेरी को तमिलनाडु में मिलाकर इसका अलग दर्जा खत्म करने का षड्यंत्र रचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री और बेदी पर पुदुचेरी की जनता को उनके अधिकारों से वंचित करने के लिये प्रयासरत होने का भी आरोप लगाया।

अलोकतांत्रिक है उपराज्यपाल की कार्यशैली

वीसीके नेता टी. तिरुमावलावन और भाकपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव मुथारसन ने उपराज्यपाल की अलोकतांत्रिक कार्यशैली की आलोचना की। मुथारसन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि लोकतंत्र और लोगों के कल्याण में भरोसा करते हैं तो उन्हें हस्तक्षेप कर बेदी को हटाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों के आंदोलन को समाप्त करने के प्रयासों के तहत फासीवादी और निरंकुश रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

एक साल पहले भी लगा चुके हैं आरोप

इस धरने में कांग्रेस की सहयोगी डीएमके की अनुपस्थिति राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने फरवरी, 2019 में भी उपराज्यपाल किरण बेदी पर गतिरोध पैदा करने का आरोप लगाया था। तब भी वह राजभवन के सामने धरने पर बैठे थे। विरोध प्रदर्शन में सरकार के सभी मंत्री, कांग्रेस और द्रमुक के विधायक भी शामिल थे। उपराज्यपाल पर जिन योजनाओं को बाधित करने का आरोप लगाया गया है, उनमें राशनकार्ड धारकों को मुफ्त चावल और पोंगल बोनस, कॉरपोरेशन, सोसायटी और सरकार की वित्त पोषित निजी स्कूलों के लिए योजनाएंं शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने दिया था फैसला, दखल का अधिकार नहीं

इससे पहले अप्रैल, 2019 में एक याचिका की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि पुदुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी के पास केंद्र शासित प्रदेश की दैनिक गतिविधियों में दखल देने का अधिकार नहीं है। याचिका की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने फैसला दिया था कि निर्वाचित सरकार के पास सेवा मामलों पर अधिकार है। इसके साथ ही कोर्ट ने उपराज्यपाल की शक्तियों पर 2017 में केंद्र द्वारा दिए गए दो स्पष्टीकरण आदेशों को रद्द कर दिया था। मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बेदी और केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

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