नई दिल्ली. केन्द्र सरकार आंदोलनकारी किसानों को मनाने के लिए तीनों कृषि कानूनों पर एक समिति बनाकर चर्चा करने को तैयार है। सरकार के सूत्रों ने ये संकेत देते हुए कहा है कि किसानों को ये बता दिया गया है कि कानून बनाने और वापस लेने की लम्बी प्रक्रिया है। इसलिए सरकार किसानों की मांगों और मुद्दों पर चर्चा के लिए समिति बना सकती है। किसानों ने सरकार के इस प्रस्ताव पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

किसान पिछले 35 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर धरना देकर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। केन्द्र सरकार से आज उनकी छठे दौर की वार्ता हुई है। किसानों ने पहले ही यह स्पष्ट कर द‍िया कि वे कानूनों को रद्द करने के मुद्दे पर ही सरकार से वार्ता करेंगे। सूत्रों के अनुसार वार्ता में सरकार ने किसानों से कहा है कि तीन कृषि कानूनों से जुड़ी मांगों और मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक समिति बनाई जा सकती है। सरकार ने बैठक में कानूनों से जुड़ी जानकारी विस्तार से दी।

किसान संगठनों ने बातचीत से ठीक पहले कृषि सचिव को पत्र भेजकर साफ़ कर दिया था कि बैठक का मुख्य एजेंडा 3 नए कृषि सुधार कानूनों को निरस्त करना और एमएसपी पर खरीद की क़ानूनी गारंटी देने तक सीमित रहेगा। जबकि सरकार तीनों नए कानून वापस नहीं लेने और एमएसपी पर सिर्फ लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है।

इससे पहले कृषि कानूनों पर एक महीने से ज्यादा समय से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए किसानों के संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच छठे दौर की वार्ता बुधवार दोपहर शुरू हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश विज्ञान भवन में 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने पहुंचे।

केंद्र ने सितंबर में लागू तीनों नए कृषि कानूनों पर गतिरोध दूर करने के लिए खुले मन से तार्किक समाधान तक पहुंचने के लिए यूनियनों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। ये वार्ता नौ दिसंबर को होने वाली थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और किसान यूनियन के कुछ नेताओं के बीच बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलने से बैठक रद्द कर दी गई थी।

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